न खाता न बही भठठा संचालक जो करे वही है सही

 


किस अधिकारी की सह पर संचालित होने लगे इट भट्ठे 

आखिर अपने कर्तव्यों पर गम्भीर क्यो नही हो रहे अधिकारी

लहरपुर-सीतापुर। नियमो और शासनादेशों का ईट भठठा संचालकों पर कोई प्रभाव ही नही पड़ रहा है। यह संचालक नियमो को ताख  पर रखकर अपनी मनमानी कर रहे है। जो जी में आता है वही करने लगते है। एक बार फिर से कानून और शासनादेशो को तोड़ो वाला खेल फिर से शुरू हो गया है वह भी ऐन चुनाव के वक्त जब सभी अधिकारियेां की डियूटी लगी है सभी अधिकारी सकुशलन चुनाव को सम्पन्न करवाने में जुट गये है तब इन भठठा संचालको ने गुनाहों को खले खेलना शुरू कर दिया है। सवाल यह भी है कि  आखिर क्या है साठ गांठ और कौन कर रहा गुमराह कैसे संचालित होने लगे अवैध भट्ठे सूत्रों की माने तो कागजी कार्यवाही में कच्चे इट भट्ठों के मालिक अपने भट्ठे के संचालन को लेकर गति देने लगे है जबकि पिछली कार्यवाही व सरकार के जिओ को नजरअंदाज कर अपनी तानाशाही का रुतबा अख्तियार किये हुए है प्रशासन की सख्ती के बाद भी फर्जी प्रदूषण का कागज न होने के बाद भट्ठों पर इट पाथने का काम मजदूरों से लिया जा रहा है आखिर ये भट्ठा मालिक कच्ची इटो का भंडारण कर कहा ले जाना चाहते है या फिर प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर मनमानी चल रही है अब सवाल यह उठ रहा है आखिर किसकी अनुमति पाकर भट्ठे को संचालित करने का पुरजोर प्रयास होने लगा है सूत्रों की माने तो सरकार ने सन 2012 के बाद संचालित भट्ठा अवैध श्रेणी में कहे जा रहे है चूंकि उनके प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण कागज पक्का नही है फिर भी भट्ठे का काम तेजी से शुरू कर सरकार व प्रशानिक अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध व्यापार को बढ़ावा देते नजर आने लगे है ये बात इसलिए कही जा रही है तहसील मुख्यालय से चंद कदमो की दूरी पर ईदगाह के समीप जमील इट भट्ठा मालिक इट पाथने का काम शुरू है जो पूरी तरीके से अवैध बताया जा रहा है जिससे लोगो के मन मे सवाल खड़े होने शुरू हो गए आखिर ऐसे भट्ठों का संचालन कैसे शुरू होने लगा और क्यों होने लगा जबकि इससे पहले ऐसे भट्ठों पर शिकंजा कस जा चुका था फिर भी अपनी मनमानी कर संचालन करने की फिराक में है अब सवाल उठ रहा है अधिकारियों पर की ये क्या हो रहा है कई बार प्रसासन की तरफ से भट्ठा मालिको पर कार्यवाही भी की जा चुकी है सख्त हिदायत के लहजे में कई बार हिदायत भी दी जा चुकी है परंतु भट्ठा मालिक सुधरने का नाम नही ले रहे है अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर प्रशासनिक अमला किस तरीके आए इनसे पेश आएगा और क्या कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।

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