कालेज का सिस्टम फेल या फिर तिकड़मबाज है विद्यालय का प्रबन्धतंत्र

 


सीतापुर।
जिले का शायद एक एकलौता इण्टर कालेज ऐसा होगा जहंा सेवा निवृत्ता हो चुके अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों को पेंशन पाने के लिये हाई कार्ट के चक्कर लगाने पड़ते है। अब इण्टर कालेज का सिस्टम गड़बड़ है या फिर प्रबन्धतंत्र ही तिकड़म बाज है यह जांच का विषय है। खुद प्रबन्धक विमल शर्मा ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि एक दो नही बल्कि कई शिक्षको को हाई कोर्ट से उनकी पेंशन मिली हम लोग हाई कोर्ट में गवाही देने भी गये थे। आखिर इस विद्यालय में ऐसा क्या था कि पेंशन पाने के लिये एक सेवा निवृत्त शिक्षक को हाईकोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते थे। वैसे यह बात दबी पड़ी रहती थी लेकिन इस समय आदर्श इण्टर कालेज में बड़ा बवाल मचा हुआ है। चर्चा यहां तक कि पीड़ित शिक्षक और प्रबन्ध तंत्र के बीच बवाल की स्थित यहां तक हो गयी है कि किसी भी समय कोई भी अपराधिक घटना घट सकती है। इसके बाद भी अगर अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान ही नही दिया जा रहा है। पीड़ित शिक्षक ने शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल  पर की और उपनिरीक्षक ने इस मामले की पड़ताल की वह भी इस गम्भीर मामले का कोई भी हल नही निकाल सके अलबत्ता उन्होने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया कि दोनो  पक्षा मानने को तैयार नही है स्थित गम्भीर है दोनो पक्षों को शांति भंग की आंशका में निरूद्ध कर दिया गया है और इस इण्टर कालेज पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मतलब शिकायत हुई उसकी जांच हुई जांच में स्थित ठीक नही नजर आयी उसके बाद मामले को विशेष निगरानी के  नाम पर टाल दिया गया। इस समय पूरे जिले और शिक्षा समाज में राकेश प्रकरण छाया हुआ है। यह प्रकरण लगातार गम्भीरता की गलियों में खोता जा रहा है। इस सम्बन्ध में जब प्रबन्धक विमलेश कुमार शर्मा से बात की गयी तो उन्होने पहले तो पीड़ित शिक्षक राकेश काण्ड पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि राकेश कक्षा में कायदे पढ़ता नही था और कक्षा में अभद्र भाषा का प्रयोग करता था इसके बाद  भी वह कई लोगों से कह रहा है कि नियुक्ति के लिये हमसे एक लाखा रूपये की मांग की गयी है। जब एक अन्य शिक्षक के बारे में प्रबन्धक श्री शर्मा से जानकारी ली गयी तब इस मामले का राज खुला और साफ हुआ कि शायद आदर्श इण्टर कालेज जिले का इकलौता ऐसा इण्टर कालेज होगा जहंा पर तैनात शिक्षक के सेवा निवृत्त होने पर उसे हाई कोर्ट जाना पड़ता है। श्री शर्मा ने ही स्वीकार किया कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी गिरिजा दयाल, व शिक्षक परमेश्वर दीन, राधेश्याम शुक्ला के सेवा निवृत्त होने पर उनको पेंशन नही मिल पा रही है अब क्या सिस्टम गड़बड़ था यह तो प्रबन्धक ही जाने लेकिन प्रबन्धक श्री शर्मा ने कहा कि हम लोग हाईकोर्ट गये गवाही देने गये थे तब जाकर इन शिक्षको को पेंशन मिली थी। उन्होने यह भी कहा कि यह सब उस दौरान हुआ जब हम इस इण्टर कालेज में प्रबन्धक पद पर तैनात नही थे। श्री शर्मा ने पीड़ित शिक्षक राकेश पर यह भी आरोप लगाया राकेश बेहद लापरवाह शिक्षक है और वह कापिंयों का मुल्याकंन भी गलत करता हेै और दस दिन का लिये गये चिकित्सा अवकाश मेें उसमें मेडिकल भी फर्जी लगाया है। श्री शर्मा ने इसके लिये गई गवाहो के नाम गिनाये और कहा यह गवाह यह कहने को तैयार है कि शिक्षक राकेश इनसे और इनके सामने कह  रहा था कि हमने तैेनाती के लिये एक लाख रूपये की रकम चुकाने को कहा जा रहा है। अब जब पीड़ित शिक्षक से बात की गयी तो पीड़ित ने तो इसकी लिखित शिकायत की है कि हमने तीन प्रबन्ध तंत्र द्वारा तीन लाख रूपये मांगे जा रहे है न देने पर हमको तरह तरह से परेशान किया जा रहा है। 

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