निराश्रित पशुओं के लिये किया गया अनेको योजनाओं का क्रियान्वयन


   सीतापुर। 
निराश्रित पशु इस समय ग्रामीण क्षेत्रों  में किसान के लिए एक बहुत बडी समस्या बनी हुई जिसकी प्रनुख वजह है ग्रामीणों के द्वारा विभिन्न वजहों से  छोड़े आश्रित पशु जो आज निराश्रित होकर हजारों की सख्या में किसानों की फसलों को नुकसान पहुचा रहे है  कभी कभी तो इन छोड़े हुए निराश्रित पशुओ से राहगीरो को भी भारी नुकसान उठाना पड़ जाता है  शासन द्वारा समय समय पर ग्रामीणों द्वारा विभिन्न वजहों से छोड़े इन आश्रित पशुओं से  निराश्रित   बढ़ती सँख्या को देखते हुए शासन ने   निराश्रित पशुओं के लिए विभिन्न योजनाओं को संचालित किया गया है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगो मे आ रही समस्याओ  से अपने आश्रित पशुओं को निराश्रित न करे और अपने परिवार को योजना के लाभ के तहत आश्रित पशुओं से मिलने वाले लाभ का फायदा दे  सके शासन द्वारा संचालित निराश्रित पशुओ को पुनः आश्रित किये जाने विभिन्न योजनाओं में एक योजना है  सहभागिता योजना इस योजना का लाभ ग्रामीण ऑनलाइन  प्राप्त कर सकते है इस योजना में प्रति निराश्रित पशु को आश्रित करने पर उन्हें घर ले जाने पर  आश्रय देने वाले व्यक्ति को   900  रुपये प्रति माह मिलते है  इस योजना को  निराश्रित गाय सहभागिता योजना 2021 के नाम से आवेदन किया जा सकता है और इसका लाभ निराश्रित पशुओं को आश्रय देना वाला व्यक्ति उठा सकता है  शासन द्वारा शुरू की गई इस योजना  में निराश्रित, बेसहारा गोवंश को  आश्रय  देने  वाले व्यक्ति  को 30 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु के हिसाब से प्रदान किए जाते है  ताकि वह इन बेसहारा पशुओं की देखभाल कर  सके  यह योजना राज्य में घूम रहे बेसहारा और निराश्रित पशुओं के लिए शुरू की गई है जिससे लोग इन पशुओं को अपने घर में ले जाकर इनकी देखभाल करें. गोवंश सहभागिता योजना के तहत प्रत्येक ऐसे जानवर को गोद लिया जाता है जिसे निराश्रित गौ भागीदारी योजना के तहत पहचान के उद्देश्य से रखा जाता है। वर्ष  2019 में, प्रदेश  में किसानों ने निराश्रित आवारा पशुओं को किसान के  खेतों में फसलों को नष्ट करने का विरोध किया था। इसीलिए शासन  ने यह योजना लागू की था जिससे किसानों की फसलों को नष्ट होने से रोका जा सके   इस सह-सहभागिता योजना में, शासन  निराश्रित पशुओ की देखभाल करने वाले लोगों को हर महीने 900 रुपये देती है। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह गायों को संरक्षित करने के साथ-साथ अल्पपोषित बच्चों को पोषण प्रदान करने के दोहरे उद्देश्य को पूरा करता है।  यह धनराधि  इच्छुक व्यक्ति के बैंक खाते में  भेजी जाती है । प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को इस योजना के तहत जिम्मेदारी दी गई है कि जिलों में ऐसे इच्छुक किसानों, पशुपालकों और स्वयंसेवकों का चुनाव करें जो निराश्रित गोवंश पालने को तैयार हैं। योजना का पात्र केवल वह व्यक्ति होगा जो उत्तर प्रदेश  राज्य का मूल निवासी हो और वर्तमान में अपने मूल निवास में रह रहा हो साथ ही व्यक्ति को गोवंश के पालन पोषण का अनुभव हो तथा उसके पास पशु रखने का पर्याप्त स्थान होएक व्यक्ति को केवल 4 गोवंश ही दिए जाएंगे जिसमें नहीं जन्मे बछड़े की गणना नहीं की जाएगी अर्थात गाय और उसकी दूध पीती बछिया को एक ही माना जाएगायोजना के लाभार्थी एवं आवेदक के पास बैंक खाता होना चाहिए और उसका आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक होना चाहिएदुग्ध समितियों से जुड़े व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगीइच्छुक व्यक्ति चयन हेतु निर्धारित प्रारूप पर अपने पहचान पत्र (आधार कार्डध् वोटर कार्डध् राशन कार्ड) तथा बैंक पासबुक की फोटोकॉपी के साथ आवेदन कर सकता है उत्तर प्रदेश सहभागिता योजना में आवेदन करने के लिए इच्छुक व्यक्ति अपने ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी एवं पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करके भी आवेदन कर सकते हैं प्रदेश में ोजना के तहत आश्रय देने वाले लोगो को हजारों  पशु दिए गए  हैं, हर महीने इस प्रणाली की समीक्षा भी की जाती है।

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