फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है सरकार : मांडविया


 गांधीनगर। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने शनिवार को यहां कहा कि केंद्र सरकार दवा क्षेत्र में पेटेंट वाली दवाओं के लिए अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए नीति बना रही है और जेनेरिक दवाओं की पहुंच बढ़ाने का भी प्रयास कर रही है। उन्होंने अफसोस जताया कि भारत भले ही बड़े पैमाने पर दुनिया को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहा है, लेकिन देश के लोग ब्रांडेड दवाओं का सेवन कर रहे हैं, जिससे इलाज का खर्चा बढ़ रहा है।

मांडविया ने कहा कि सरकार दवा कंपनियों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीति पर काम कर रही है, जिसमें इस मुद्दे को भी देखा जाएगा कि उन्हें वित्तीय सहायता कैसे दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इससे नौ महीने के भीतर कोविड-19 रोधी टीकों के अनुसंधान और उत्पादन में मदद मिली है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “स्थिति बदल रही है। हमारे वैज्ञानिकों में क्षमता थी, लेकिन प्रणाली ऐसी थी कि उन्हें दो-तीन साल बाद (मंजूरी मांगने के लिए) अनुसंधान के लिए मंजूरी मिल पाती थी। हमारी सरकार ने अधिकारियों को गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए प्रणाली को सरल बनाने का निर्देश दिया है।” उन्होंने कहा कि भारत के पास फार्मा क्षेत्र में वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए कौशल, जनशक्ति और विश्वास है। मांडविया ने कहा कि गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवा को सुलभ और सस्ती बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की संख्या बढ़कर 90,000 हो गई है तथा अगले दो वर्षों में यह बढ़कर 1.5 लाख हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि देश में 8,500 से अधिक जन औषधि केंद्र भी लोगों के लिए गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता को आधे से भी कम कीमत पर बढ़ा रहे हैं। मांडविया ने कहा, “अमेरिका में ली जाने वाली चार जेनेरिक टैबलेट में से एक और दुनिया में छह में से एक भारत में निर्मित होती है। हम दुनिया को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, और हम अपनी इलाज लागत बढ़ाने के लिए खुद ब्रांडेड दवा का सेवन कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि केंद्र की योजनाओं से देश में जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।

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