जब विभागीय अधिकारी ने डाल दिये हथियार तो भरोसा किया जाये तो किसपर ?

 


अब रामभरोसे ही चल रहा आबकारी विभाग का सिस्टम

सीतापुर। महोली कोतवाली इलाके के अंतर्गत मादक पदार्थों की तस्करी व सेवन लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद महोली कोतवाली प्रशासन मौन है। युवाओं के द्वारा मादक पदार्थों की गिरफ्त में आने से देश का भविष्य खतरे में पड सकता है। महोली कोतवाली इलाके में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त का कारोबार अपने पैर पसार रहा है। वहीं दूसरी तरफ युवाओं के द्वारा मादक पदार्थों का सेवन भी किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि खेऊ बाबा की बाग ,गाजीपुर, रेलवे स्टेशन रोड आदि जगहों पर शाम ढलते ही उड़ता  पंजाब फिल्म की तरह नशे के माहौल में इलाका सराबोर हो जाता है ।इन इलाकों में भांग, चिप्पड गांजा, कच्ची शराब आदि जैसे मादक पदार्थ खुले आम बिक रहे हैं। कुछ दुकानों पर मादक पदार्थों के सेवन के लिए विशेष प्रकार का कागज भी बिक रहा है । जिसमें मादक पदार्थों को भर कर उनका सेवन किया जाता है। युवाओं में नशे की लत उनके भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो रही है और उनका भविष्य गर्त की ओर जा सकता है । सूत्रों के द्वारा दावा किया जा रहा है कि महोली कोतवाली से चंद कदमों की दूरी पर ही कच्ची शराब बड़े पैमाने पर बनाई व बेची जा रही है। कच्ची शराब के काले साम्राज्य में महिलाएं भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं। एक तरफ कप्तान आरपी सिंह मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं वहीं दूसरी तरफ आबकारी विभाग की एक जिम्मेदार महिला अधिकारी का बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके द्वारा कहा गया है कि जब पुलिस कच्ची शराब की बिक्री पर लगाम नहीं लगा पा रही है तो हम क्या करें। यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक जिम्मेदार अधिकारी का इस प्रकार का बयान विवादों के घेरे में आ रहा है। जब जिम्मेदार अधिकारी ही इस प्रकार का बयान देंगे तब कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है? क्या यह मानना उचित होगा कि आबकारी विभाग व पुलिस महकमे में आपसी सामंजस्य की कमी है? जिसके कारण मादक पदार्थों की बिक्री व सेवन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।


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