अमित शाह को गुजराती से ज्यादा हिंदी से है प्यार


 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतियां शुरू हो चुकी हैं। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिन्दी सभी स्थानीय भाषाओं की सहेली है और इनके बीच कोई अंतर्विरोध नहीं हैं। वाराणसी के दीन दयाल हस्तकला संकुल में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में शनिवार को केन्द्रीय गृह मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को राजधानी दिल्ली से बाहर करने का निर्णय हमने वर्ष 2019 में ही कर लिया था।

उन्होंने कहा कि हम सब हिंदी प्रेमियों के लिए भी यह संकल्प का वर्ष होना चाहिए कि आजादी के 100 साल जब हों तो इस देश में राजभाषा और हमारी स्थानीय का दबदबा इतना हो कि किसी भी विदेशी का सहयोग लेने की जरूरत नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि यह काम आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था। आजादी का आंदोलन जिसे महात्मा गांधी ने लोक आंदोलन में परिवर्तित किया इसके तीन स्तंभ थे स्वराज, स्वदेशी और स्व। स्वराज तो मिल गया स्वदेशी भी पीछे छूट गया और स्व भी पीछे छूट गई।

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