संयुक्त किसान मोर्चा का फैसला, जारी रहेगा आंदोलन, 22 को लखनऊ में होगी रैली, 26 को मनाया जाएगा जश्न

 


केंद्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बाद भी फिलहाल किसान आंदोलन जारी रहेगा। कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद आज संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि फिलहाल यह आंदोलन जारी रहेगा। दर्शन पाल सिंह ने आगे कहा कि आज की बैठक में फैसला लिया गया कि हमारे 22, 26 और 29 नवंबर को जो कार्यक्रम होने वाले हैं वो जारी रहेंगे। 22 को लखनऊ रैली, 26 को पूरे देश में किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर जश्न मनाया जाएगा और 29 को ट्रैक्टर मार्च (संसद तक) होगा। आंदोलन जारी रहेगा।

दर्शन पाल ने बताया कि 22 तारीख को लखनऊ की रैली को कामयाब करना है। अगर लखीमपुर खीरी में हमारे साथियों को परेशान करने की कोशिश की जाती है तो फिर हम लखीमपुर खीरी इलाके में आंदोलन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के अलावा हमारे मुद्दे, विशेष रूप से एमएसपी, हमारे खिलाफ मामलों को वापस लेना, बिजली विधेयक 2020 और वायु गुणवत्ता अध्यादेश को वापस लेना, और हमारे मरने वाले दोस्तों के लिए एक स्मारक के लिए एक स्थान का आवंटन लंबित है। हमें उम्मीद है कि सरकार मुद्दों को हल करने के लिए बैठक बुलाएगी। 

आपको बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के एक साल पूरा होने के मौके पर 29 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र के दौरान रोजाना संसद तक 500 किसान शांतिपूर्ण ट्रैक्टर मार्च में भाग लेंगे। एसकेएम ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत किया लेकिन कहा कि वे इस घोषणा के संसदीय प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रभाव में आने तक की प्रतीक्षा करेंगे। उसने यह संकेत भी दिया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी और विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग के लिए उसका आंदोलन जारी रहेगा। 

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