BSF के अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद, कैप्टन ने कहा- फैसले से मजबूत होगा देश, चन्नी ने संघीय ढांचे पर सीधा हमला बताया


 केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कई कई सीमावर्ती राज्यों के अंदर कार्रवाई करने के अधिकार क्षेत्र को बढ़ा दिया है। राज्य इसका विरोध कर रहे हैं और इसे उनके अधिकारों पर अतिक्रमण बता रहे हैं। बीएसएफ के अधिकारों पर चरणजीत सिंह चन्नी और कैप्टन अमरिंदर सिंह आमने-सामने हैं। एक तरफ जहां चन्नी ने इसे अधिकारों का हनन बताया तो वहीं कैप्टन अमरिंदर ने फैसले से देश के मजबूत होने की बात कही है। 

चन्नी ने संघीय ढांचे पर हमला बताया 

पंजाब के मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए ट्वीट किया, ‘‘मैं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ 50 किमी के क्षेत्र में बीएसएफ को अतिरिक्त अधिकार देने के भारत सरकार के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूं, जो संघवाद पर सीधा हमला है। मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस असंगतनिर्णय को तुरंत वापस लेने का आग्रह करता हूं। चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि कैबिनेट के मंत्रियों ने भी फैसले का विरोध किया है। 

कैप्टन ने फैसले को सही ठहराया

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इस कदम के समर्थन में कहा, ‘‘बीएसएफ की बढ़ी हुई उपस्थिति और शक्तियां ही हमें मजबूत बनाएगी। आइए केंद्रीय सशस्त्र बलों को राजनीति में न घसीटें। उनके मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने ट्वीट कर कैप्टन के बयान का जिक्र करते हुए बताया 'हमारे जवान कश्मीर में शहीद हो रहे हैं। हम देख रहे हैं कि पंजाब में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हथियार और ड्रग्स भेज रहे हैं। ऐसे में बीएसएफ की मौजूदगी और बढ़ी हुई शक्तियां हमें मजबूत बनाएंगी।' कैप्टन ने ये भी कहा कि जब भारत की सुरक्षा की बात आती है तो हमें राजनीति से ऊपर उठना होगा। 

मामला क्या है?

  •  केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर बीएसएफ का अधिकार बढ़ाया।
  • पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में बीएसएफ के अधिकार बढ़ाए गए। 
  • तीन राज्यों में बीएसएफ की सीमाओं में परिवर्तन किया गया। 
  • 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर का दायरा बीएसएफ को दिया गया है।
  • पासपोर्ट एक्ट, एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी और गिरफ्तारी 
  • कस्टम एक्ट और सीआरपीसी के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी 
  • फैसले के बारे में विस्तार से 

    केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कानून में संशोधन कर इसे पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर की जगह 50 किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तार करने की शक्ति दे दी है। वहीं, पाकिस्तान की सीमा से लगते गुजरात के क्षेत्रों में यह दायरा 80 किलोमीटर से घटाकर 50 किलोमीटर कर दिया गया है तथा राजस्थान में 50 किलोमीटर तक की क्षेत्र सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में 11 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की।  

     क्यों लिया गया फैसला?

    पाकिस्तान की तरफ से लगातार कई तरह की हरकते हो रही हैं। हालिया दिनों में अफगानिस्तान में तालिबान राज में इन हरकतों में और इजाफा हो गया है। ये 3323 किलोमीटर लंबा बॉर्डर चिंता का एक बड़ा सबब है। पहले के दिनों में पंजाब में अमृतसर से 15 किलोमीटर पीछे तक बीएसएफ के लोग जा सकते थे और पेट्रोलिंग हो सकती थी। उसके तहत वो जब्ती कर सकते थे, तलाशी ले सकते थे और गिरफ्तारी कर सकते थे। लेकिन कई बार घुसपैठिए रातों रात 15 किलोमीटर का सफर तय करके आगे निकल जाते थे। फिर ज्यूरीडिक्शन पर पेंच फंसता था। इस खींचतान में नेशनल सिक्योरिटी से समझौता नहीं हो इसलिए ये फैसला लिया गया। अब अमृतसर समेत 20 किलोमीटर तक ज्यूरीडिक्शन हो सकता है। बांग्लादेश के साथ चुनौतियां कम नहीं हैं। 4097 किलोमीटर लंबी सीमा जुड़ती है। 

  • क्या फायदा होगा? 

    • दुश्मनों की घेराबंदी और नाकाबंदी आसान होगी 
    • अवैध हथियारों की सप्लाई पर लगाम लगेगी
    • सीमा पार से तस्करी पूरी तरह कम हो जाएगी 
    • नॉरकोटिक्स/हथियारों की तस्करी के खिलाफ ऑपरेशन आसान होगी
    • 50 किलोमीटर भीतर तक घुसपैठियों की मूवमेंट पर एक्शन लिया जा सकेगा
    • घुसपैठ के बाद आतंकी आम लोगों के बीच छिप जाते थे
    • पकड़ने पर पुलिस के लिए कार्रवाई का प्रोसेस लंबा होता था 

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