ठेंठ अशिक्षित क्षेत्र में सक्षम व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया स्वतंत्र ने

 


लखीमपुर : विपरीत परिस्थितियों में ठेंठ अशिक्षित क्षेत्र में शिक्षा की रोशनी बिखेर कर खुद को आदर्श और सक्षम व्यक्तित्व के रूप में स्वतंत्र गुप्ता ने स्थापित किया। स्वतंत्र नारी जगत के लिए वह प्रेरणास्रोत बन गई हैं। 

पशु पक्षियों से गहरा प्रेम, बागवानी का हुनर,कविता और शायरी से जुड़ाव तथा नवाचार की पक्षधर होना ही स्वतंत्र को अन्य महिलाओं से विशेष बनाता है।स्वतंत्र जब  हाईस्कूल में थीं तो माता शेष जीवन बिताने के लिए ऋषिकेश के गीता भवन चलीं गईं। पिता जी की प्रेरणा से स्वतंत्र की चारों बहनों ने अपनी अलग पहचान बनाई। पी के कान्वेंट स्कूल  की वह मुख्य प्रशासिका भी हैं। स्वतंत्र के पति इंटर कालेज के अध्यापक हैं। स्वतंत्र ने शाहजहांपुर में रहकर बच्चों को पढ़ाया। तीन बेटे हैं, एक बेटा अभिजीत बैंक मैनेजर है, तो देवाशीष प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। अभिमीत अपने स्कूल को संभाल रहा है।
बेटी न होने का अभाव दूसरों की बेटियों से प्रेम का सेतु बन गया। स्कूल की चीफ़ होने के बाद भी स्टाफ से आत्मीयता और महिला स्टाफ को तो वह अपनी बेटी जैसा ही मानती हैं। मृदुभाषिता उनका सबसे बड़ा अट्रैक्शन है।
 ससुराल में सबसे बड़ी चुनौती स्वतंत्र के लिए तत्काल घर की दहलीज को पार करने की थी।  कुछ करने, कुछ बनने और खुद को स्थापित करने का संकल्प था। संस्कारों की वह हमेशा पोषक रहीं। पति का भरपूर सहयोग उनकी डगर का संजीवनी बना। पशु प्रेम और पेड़ पौधों की देखभाल  उनकी अभिरुचि है। घर में अब एक पोती आ गयी है जो उनके जीवन की जिजीविषा का केंद्र बिंदु है।  स्वतंत्र धैर्य,संयम और विवेक को सफलता का त्रिदेव मानती हैं।

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