क्षेत्र की उन्नति हो चाहें जनप्रतिनिधि करवायें या फिर जनहित में न्यायालय से हो : राजीव गुप्ता



तिकुनियां खीरी।
प्रसपा महासचिव एवं समाजसेवी राजीव गुप्ता दिन ब दिन इसी प्रयास में लगे रहते हैं कि किसी भी तरह क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का समाधान होना चाहिए, क्षेत्र की उन्नति हो वह चाहें जनप्रतिनिधि करवायें या फिर जनहित में न्यायालय से हो, मामला चाहें ट्रेन का हो, चीनी मिल के भ्रष्टाचार का हो, चीनी मिल के मजदूरों के शोषण का हो या फिर चाहें पचपेड़ी घाट के पुल का मुद्दा हो राजीव गुप्ता जनहित के मुद्दों को लगातार उठाते रहते हैं ।
लखीमपुर जाने के लिए यहां से करीब 17 किलोमीटर का ज्यादा फासला तय करने से जनता को अत्यंत परेशानी होती आ रही। राजीव गुप्ता के मुताबिक पिछले 50 वर्षों से आज तक के जनप्रतिनिधि ने अगर पचपेड़ी पुल निर्माण के लिए कोई भी प्रत्यावेदन प्रदेश के मंत्री या प्रमुख सचिव को दिया है या कोई आदेश करवाया है तो जनता और मीडिया के सामने दिखाए, सच तो ये है कि कभी किसी ने ईमानदारी से पहल ही नही की, पहले कहते थे पुल निर्माण करवाएंगे अब कहते है पुल बन ही नही सकता।

हाईकोर्ट ही करेगा पचपेड़ी घाट पुल का फ़ैसला:

 राजीव गुप्ता ने बताया कि मै एक आम आदमी हूँ, जनहित के मुद्दे लगातार उठाऊँगा, बंद ट्रेन चलवा कर हौसला बढ़ा है, इसीलिए समय समय पर जनहित मामलो को लेकर पी आई एल दाखिल करता रहा हूँ, अब पचपेड़ी घाट के पुल की बारी है। उन्होंने बताया कि नानपारा-मैलानी ट्रेन के लिए जब जनहित याचिका की तो विरोधी हँसते थे, 15 महीने मुक़दमा लड़ा,फिर लेकिन कोर्ट के दबाव में ट्रेन चली, गरीब जनता को राहत मिली।
उत्तराखंड त्रासदी में जनहित याचिका दाखिल की, पीड़ित परिजनों को मुआवज़ा मिल रहा है, इसी माह फिर सुनवाई होने वाली है उम्मीद है कुछ बड़ा फ़ैसला होगा, निघासन क्षेत्र की लाइफ लाइन कही जाने वाली सरयू सहकारी चीनी मिल में भ्र्ष्टाचार, श्रमिकों के शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई उसकी जाँच की आँच से बचने के लिए 150 से 170 तक देने पर कोई नही बोला उन का अधिकार 300 का है चीनी मिल को वेतन 300 करना होगा।
रही बात पचपेड़ी पुल की तो मुझे उस रास्ते से लखीमपुर जाना होता है इसलिए प्रयास करता हूँ, जनहित याचिका भी दाखिल की है। प्रोजेक्ट बना और इस को बांध के रखा गया आख़िर क्यों? और इसका जिम्मेदार कौन है? श्री गुप्ता ने यह भी बताया कि पचपेड़ी घाट के पुल का फैसला अब उच्च न्यायालय ही करेगा जिसकी सुनवाई अर्जी दी जा चुकी है उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हित के लिए वह अपने खर्चे से जनहित में जनहित याचिका दाखिल कर मुक़दमा लड़ते आएं हैं और लड़ते रहेंगे।

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