पुरवा पिपरिया में शौचालयों की जांच में हुये खुलासे से ब्लाक में मचा हड़कंप


 जांच में 75 शौचालय नही बने, 18 मृतक, 6 लोग गांव में ही नही रहते

सरकारी कर्मी को दिया गया लाभ 

शाहाबाद। खुले में शौच मुक्त करने का सपना पिपरिया गांव में सफेद झूठ साबित हो रहा है। भारत सरकार के स्वछता मिशन अभियान के सच का आईना दिखाने के लिए पिपरिया गांव ही काफी है जहां 2 वर्ष पूर्व कराये गये शौचालय निर्माण में जमकर लूट होने की पुष्टि सेकेट्री की जांच के दौरान सामने आई है। जिससे ब्लाक प्रशासन के हाथ पांव फूल गये और जांच अधिकारी को जांच करने से रोक दिया गया। गौरतलब हो कि स्वछ भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत पिपरिया में एसबीएम के तहत लगभग 4 सौ व एलओबी एक और 2 के तहत भी शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया गया था परंतु पूर्व प्रधान ने लक्ष्य के सिर्फ 70 प्रतिशत ही शौचालयों का निर्माण कराया। शेष शौचालयों का बिना निर्माण कराये ही पैसा अवैध फर्मों के नाम से निकाल लिया और सूची वद्ध लाभार्थियों को कानों कान भनक तक नहीं नही लगने दी। ग्राम प्रधान नानक चन्द्र की शिकायत पर कराई जा रही जांच में शौचालय निर्माण में बहुत बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान ग्राम पंचायत में लगभग 3 सौ शौचालयों का निर्माण पाया गया। जांच के दौरान 18 मृतकों के नाम से धनराशि निकल जाने की पुष्टि हुई। जबकि 75 से अधिक लोंगो को शौचालय का लाभ न देकर फर्जी फर्मों के माध्यम से पैसा निकालने के साक्ष्य मिल रहे हैं। वहीं 6 लोग ऐसे भी है जो गांव में ही नही रहते है। जांच में 18 लोग ऐसे लोग पाये गये जो10 से 15 वर्ष पहले ही स्वर्गवासी हो गये हैं। ग्राम प्रधान नानक चन्द्र ने पूर्व प्रधान व सचिव पर शौचालय निर्माण में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुये उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। बीडीओ प्रमेन्द्र पांडेय की ओर से  ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारी से जांच कराई गई। जांच में शौचालय निर्माण में घोटाले का सच सामने आने पर बीडीओ ने सेक्रटरी को जांच से रोक दिया। जांच अधिकारी शिवांशु ने बताया कि शौचालय की धनराशि लाभार्थियों को न देकर फर्मों के खातों पर भेजी गई।


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