कैंसर : किसानों को खून के आंसू रुला रहा है गन्ने का लाल सड़न,चौपट हो रहे किसानों के गन्ने की फसल



गोला गोकरण नाथ खीरी । कुदरत की मार झेल रहे किसानो को इंसानी मार भी झेलनी पड़ रही है जिससे वह कराह उठा है। एक और जहां गन्ने का कैंसर लाल सड़न बीमारी के चलते पूरे खेत के खेत सूखते नजर आ रहे हैं। इस ओर ना तो सरकार का ही ध्यान हो रहा है और ना ही मिल मालिकों का। इससे बड़ा दुर्भाग्य और विडंबना क्या हो सकती है। किसानों के आंसू पोंछने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। बड़े किसानों को दवा और नई प्रजाति के गन्ने के बीज बोने में दिक्कत नहीं आती वहीं छोटे सीमांत किसानों के लिए बहुत बड़ा अभिशाप गन्ना बनकर रह गया है। ऐसे में खेती-किसानी से जुड़े आधुनिक तकनीक से गन्ना पैदा कर रहे किसान विनीत सिंह भदोरिया का कहना है कि सभी को पता है कि वर्तमान गन्ना क्षेत्रफल की दो प्रजाति को0-0238 और 18 में लाल सड़न बीमारी लगने के कारण गन्ना खेत में सूख जाता है जिससे किसान को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस बीमारी का कोई स्थाई समाधान ना होने के कारण गन्ने की प्रजाति को बदलने का काम चीनी मिलों एवं सरकारी गन्ना विभाग के द्वारा युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। जिससे सभी किसानों में अफरा-तफरी का माहौल है। कुछ लोग गन्ना बीज को बहुत ही अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। और किसानों की इस समस्या में लाभ कमाने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे कि हमारे किसान बहुत ज्यादा परेशान हैं। सरकार सभी किसानों को उचित मात्रा में बीज दिला सके इसके लिए प्रशासन को कुछ कदम उठाने चाहिए। जिससे सभी किसान के सुझाव का प्रचार प्रसार करने की आवश्यकता है। किसान अपने गन्ना मूल्य समय से नहीं आने के कारण वैसे ही परेशान है। अगर किसानों को ऐसे मे सूखा रोग जैसी बीमारियों से भी निपटना पड़ा तो किसान की कमर टूट जाएगी और गन्ने की खेती चौपट हो जा रही है।

किसानों की समस्या उन्ही की जुबानी

खेतों में  गन्ने की फसल में सूखा रोग बढ़ता जा रहा है यह भी कहना गलत है कि सिर्फ जीरो 0238 में रोग लग रहा है। रोग का प्रकोप अन्य गन्ना प्रजातियों मैं भी है चीनी मिल और गन्ना समिति किसानों की फसल को रोग से बचाने के लिए कोई सहयोग नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना किसान दिन पर दिन बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है।उत्तर कुमार मौर्य (किसान) 

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