दस्तावेजों में 54 फीट की जगह पर 76 फीट की जगह पर कब्जा कर रास्ता बंद करने का आरोप




न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद भी रात के अंधेरे मे सड़क पर कब्जा करने का आरोप।



ग्रामीण कोर्ट की प्रक्रिया ही पूरी करते रह गए लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया धरी की धरी रह गई
प्रशासन से मिलीभगत कर किया सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा कराने का आरोप।

लखीमपुर खीरी।मामला जिला लखीमपुर खीरी की तहसील गोला गोकर्णनाथ के ब्लॉक कुम्भी के अंतर्गत जगदंबा कॉलोनी का है। जहां पिछले लगभग 2 महीने से विपक्षी के द्वारा पिछले 10 साल से चल रही सड़क पर कब्जा करने को लेकर कोतवाल गोला, एसडीएम गोला से लगाकर कोर्ट में वाद तक कर दिया। जिसकी वाद संख्या 134/2021 है। लेकिन फिर भी विपक्षी तहसील व पुलिस प्रशासन के साथ मिलीभगत कर दिनांक 11 सितंबर 2021 को सड़क पर कब्जा कर दीवार खड़ी करने में कामयाब हो गये। ग्रामीणों की माने तो ग्रामीणों ने 18 अगस्त 2021 को सिविल कोर्ट में मामले को न्यायालय के समक्ष रखा जिसको लेकर न्यायालय की तरफ से कमिश्नर रिपोर्ट बनवा कर सरकारी वकील से मौके की रिपोर्ट भी ली और न्यायालय ने दोनों पक्षों को तामिल किया। लेकिन विपक्षी मौके पर नहीं पहुंचा जिसको लेकर न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए अगली तारीख रखी ही थी कि उससे पहले विपक्षी ने अपनी सांठगांठ कर सड़क पर कब्जा करने के मंसूबे मे कामयाब रहा। ग्रामीण तहसील व पुलिस प्रशासन को कोर्ट में चल रहे प्रक्रिया के बारे में बताते रहें।लेकिन तहसील व पुलिस प्रशासन ने विपक्षी की मदद करने मे कोई कसर नहीं रखी और अंततः कब्जा करवा ही दिया। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मामला जब माननीय न्यायालय में विचाराधीन था तो विवादित जमीन और रास्ते का मामला लंबित होने पर निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता था लेकिन एसडीएम गोला तहसील के राजस्व विभाग के लेखपाल कानूनगो ने न्यायालय के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए उक्त रास्ते पर निर्माण कराने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। 

इस संबंध में जब क्षेत्रीय लेखपाल जेपी वर्मा से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि दो प्रॉपर्टी डीलरों के द्वारा प्लाटिंग की गई है। जिसमें किसी भी प्रॉपर्टी डीलर के द्वारा कहीं भी रास्ता नहीं छोड़ा गया है। राजस्व विभाग के अभिलेखों में जहां तक रास्ता नक्शे में दिखाया गया है वहां तक रास्ता कब्जा मुक्त जिनके द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है। उन्होंने अपने जमीन से आगे की जमीन पर कब्जा किया है। जो राजस्व अभिलेखों में मौजूद नहीं मिला है। यदि ग्रामीणों ने रास्ते के लिए माननीय न्यायालय में मुकदमा दायर किया था तो उस पर स्थगन आदेश राजस्व अधिकारियों को दिलाना चाहिए था। जिससे उपरोक्त निर्माण कार्य को रोका जा सकता था। लेकिन न्यायालय के द्वारा कोई भी अभिलेख ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जिसके चलते जमीन पर अपना निर्माण कार्य कराया गया है । माननीय न्यायालय का आदेश यदि मिलता है तो निर्माण रुकवा दिया जाएगा।

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