इंग्लैण्ड के ‘ग्लोबल पायनियर अवार्ड-2021’ से डा. जगदीश गाँधी सम्मानित

 


लखनऊ,
5 सितम्बर। इंग्लैण्ड के ‘ग्लोबल पायनियर अवार्ड-2021’ से प्रख्यात शिक्षाविद् एवं सिटी मोन्टेसरी स्कूल के संस्थापक-प्रबन्धक डा. जगदीश गाँधी को सम्मानित किया गया है, जो कि लखनऊ के लिए ही नहीं अपितु देश के लिए गौरव की बात है। यह पुरस्कार डा. गाँधी को शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया है। अवार्ड के लिए बनाई गई ज्यूरी ने डा. गाँधी को ‘ग्लोबल पायनियर अवार्ड’ देने का निर्णय लिया, साथ ही डा. गाँधी के द्वारा शिक्षा के माध्यम से विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं विश्व के ढाई अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य के प्रयासों को सराहा। उक्त जानकारी सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने है। श्री शर्मा ने बताया कि वैसे तो शिक्षा के क्षेत्र में डा. जगदीश गाँधी को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों व सम्मानों से नवाजा जा चुका है, परन्तु ‘ग्लोबल पायनियर अवार्ड-2021’ का अपना अलग ही महत्व है जो कि शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नवीनता एवं उपलब्धियों को प्रोत्साहित करता है। 

श्री शर्मा ने बताया कि इस विश्व प्रतिष्ठित अवार्ड हेतु विश्व की 6 प्रख्यात हस्तियों में से डा. गाँधी को चुना जाना शिक्षा के क्षेत्र में डा. गाँधी के योगदान को स्वयं ही प्रमाणित करता है, साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत एक वैश्विक लीडर के तौर पर स्थापित करता है। डा. गाँधी विगत 62 वर्षों से सम्पूर्ण विश्व में शिक्षा के 

माध्यम से एकता व शान्ति स्थापना का परचम लहरा रहे हैं एवं भावी पीढ़ी के सुन्दर, सुखमय व सुरक्षित भविष्य हेतु आदर्श विश्व व्यवस्था की स्थापना में जी-जान से जुटे हैं। डा. गाँधी ने वर्ष 1959 में महज 5 बच्चों से सी.एम.एस. की स्थापन करते हुए ‘जय जगत’ अर्थात ‘विश्व का कल्याण हो’ को विद्यालय का ध्येय वाक्य चुना और इन्हीं आदर्शों पर चलते हुए पिछले 62 वर्षों से सी.एम.एस. अपने छात्रों को विश्व की सर्वोत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के साथ ही विश्व नागरिक भी बना रहा है। आज, संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनबल डेवलपमेन्ट गोल एवं भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी ‘विश्व नागरिक शिक्षा’ को  स्थान दिया गया है। 

श्री शर्मा ने बताया कि इस अवार्ड हेतु प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डा. गाँधी ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में विश्व के सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, ऐसे में भावी पीढ़ी को शुरूआत से ही विश्व नागरिक बनाना एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों का आयोजन अपरिहार्य ही है क्योंकि जलवायु परिवर्तन, अशिक्षा, गरीबी जैसी अनेकों वैश्विक समस्याओं के समाधान वैश्विक दृष्टिकोण से प्राप्त किये जा सकते हैं। 


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