अब काकोरी 'कांड' नही 'ट्रेन एक्शन

 


भाजपा का तर्क कांड शब्द से शहीदों का अपमान होता है, काकोरी ट्रेन एक्शन तो शौर्य का प्रतीक है..

अब तक आपने इतिहास की किताबों में 9 अगस्त 1925 को काकोरी में क्रांतिकारियों द्वारा ट्रेन से सरकारी खजाने की लूट को 'काकोरी कांड' के नाम से पढ़ा होगा, लेकिन अब यूपी की योगी सरकार इसे काकोरी कांड की जगह 'काकोरी ट्रेन एक्शन' संबोधित कर रही है।

योगी सरकार मानती है कि अंग्रेजी शासन के कुछ इतिहासकारों ने इस क्रांति को 'कांड' करार दिया था, जो अपमानजनक लगता था। अब इसे सरकार 'काकोरी ट्रेन एक्शन' कहेगी। आज इसकी 97वीं जयंती पर सीएम योगी ने भी इसे काकोरी ट्रेन एक्शन कहा। कार्यक्रम के इन्विटेशन कार्ड में भी काकोरी कांड की जगह काकोरी ट्रेन एक्शन लिखा गया है।

काकोरी कांड कहना ब्रिटिश मानसिकता को दर्शाता है- भाजपा
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते है कि ब्रिटिश काल में इसे डकैती कहा गया और राष्ट्रनायकों को अपराधी बता कर दंडित किया गया। दुर्भाग्य यह है कि आजादी के बाद भी ब्रिटिश मानसिकता की वजह से इसे कांड कहा जाता रहा। हमारी सरकार ने इसे शौर्य का प्रतीक माना है। हमारी सरकार ने इसे गर्व का पल मानते हुए उन शहीद क्रांतिकारियों का सम्मान किया है।

अंग्रेज इतिहासकारों ने इसे काकोरी ट्रेन डकैती कहा
इतिहासकार रवि भट्ट कहते है कि काकोरी में ट्रेन में हुई सरकारी खजाने की लूट को अंग्रेज काकोरी ट्रेन रॉबरी या डकैती कहते थे। कभी भी जब दो पक्षों में लड़ाई होती है तो दोनों का अपना अपना पक्ष होता है। हिंदुस्तानियों के नजरिए में यह डकैती कतई नही थी, क्योंकि इसमें क्रांतिकारियों का अपना कोई व्यक्तिगत लाभ नही था।

इतना ही नहीं, रवि भट्ट कहते है कि भारत में इतिहास लेखन का काम अंग्रेजों ने ज्यादा किया। उसके बाद उनके लिखे शब्द आगे बढ़ते गये और प्रचलन में आ गये। अगर योगी सरकार इसे काकोरी ट्रेन एक्शन कहती है तो यह स्वागत योग्य है क्योंकि इससे लोगों में इसे जानने के लेकर एक जिज्ञासा होगी। लोग काकोरी के बारें में जानने की कोशिश करेंगे।

क्या है काकोरी ट्रेन एक्शन?
दरअसल,9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने काकोरी में एक ट्रेन में डकैती डाली थी। इसी घटना को ‘काकोरी कांड’ के नाम से जाना जाता है।‘हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन’ के क्रांतिकारियों ने इस घटना को अंजाम दिया था उनका मकसद था इस लूट से मिले पैसों से हथियार खरीदना और उसे अंग्रेजों के खिलाफ इस्तेमाल करना।
हालांकि अंग्रेजों द्वारा उन्हें चोर-लुटेरा बोल कर बदनाम किया जाता था। शुरूआत में चोरी की घटनाओं में निर्दोष लोंगो की भी जान जाती थी। बाद में क्रांतिकारियों द्वारा अपनी योजना में बदलाव किया गया जिसकी वजह से वह सिर्फ सरकारी खजाने को अपना निशाना बनाते थे।

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