भगवान ने इन्द्र का अभिमान तोड़ने के लिए कराया गोवर्धन पूजन :अनूप

 


बावन हरदोई।
विकास खंड के ग्राम रामपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन असलापुर धाम से पधारें सुप्रसिद्ध कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म की मधुर बधाईयों से कथा का शुभारंभ किया। श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव बड़े धूमधाम से कई महीनों तक बृज में मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य बाल लीलाओं से बृज के गोपी, ग्वालों को आनंद प्रदान किया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी द्वारा हर गोपी के घर में जाकर भगवान उनका मनोरथ पूर्ण करते हैं। भगवान ने बृज में रहते हुए पांच व्रत लिए पहला बृज में कभी केश नहीं कटवाए, दूसरा बृज में कभी सिले वस्त्र नहीं पहने, तीसरा बृज में कभी अस्त्र नहीं उठाए, चैथा बृज में कभी पादुका धारण नहीं की और पांचवां बृज में जब तक रहे तब तक मोर मुकुट के अलावा कोई मुकुट धारण नहीं किया, भगवान की बाल लीलाओं, पूतना-मोक्ष, तृणावर्त उद्धार, नामकरण संस्कार, माखन चोरी लीला आदि की कथा विस्तार से सुनाई गोवर्धन भगवान की पूजा का प्रसंग सुनाते हुए अनूप ठाकुर महाराज ने कहा कि गोवर्धन पूजा परमात्मा में आस्था का प्रतीक है उन्होंने कहा कि भगवान ने कर्म की प्रधानता बताने के साथ ही देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए सर्वज्ञ होते हुए भी दीपावली के दूसरे दिन तमाम पकवान, मेवा-मिष्ठान्न बनते देख अबोध की तरह नंदबाबा से पूछा, पिताजी यह क्या हो रहा है! इसका क्या उद्देश्य है! नंदबाबा द्वारा इंद्रयोग की तैयारी सुनकर भगवान ने कहा कर्म से ही शत्रु, मित्र, हानि-लाभ, जीवन-मरण आदि का निर्धारण होता है, अतः कर्म ही श्रेष्ठ है। फलदाता इंद्र नहीं कोई अन्य है, जो कर्मों के अनुसार फल देता है, जिससे आसानी से आजीविका चले, पूजा उसकी करनी चाहिए। भगवान की भक्त-वत्सलता पर प्रकाश डालते हुए अनूप महाराज ने कहा कि इससे बड़ी बात भला क्या हो सकती है! जो सारे विश्व का भरण-पोषण करने वाला है वह स्वयं गिरिराज के अंदर बैठ कर प्रसाद प्राप्त कर रहा है गोवर्धन पूजा के मधुर गीतों से श्रोता पंडाल में झूम उठें आयोजक ज्ञानू कुशवाहा, सूर्यप्रताप मिश्रा, शैतान कुशवाहा, राजेश, रणबीर, विमल शास्त्री, श्याम मोहन आचार्य आदि मौजूद रहे।


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