अब इज्जतघर में इज्जत बचाना हुआ मुश्किल, अधूरे पड़े शौंचालय बयां कर रहे बदहाली की दास्तां

 

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फाइलों का मौसम गुलाबी करने में जुटे रहे प्रधान-सेक्रेटरी, जमीनी हकीकत कुछ और

लाभार्थी के खाते में नहीं पहुंचा पैसा, फिर भी बने खड़े अधूरे शौंचालय 

शाहाबाद। सियासत के नेता होते हैं बड़े खिलाड़ी, इनको चुनना जनता की है लाचारी। जी हां, जिले के शाहाबाद ब्लॉक के गांव घियरई में बने शौंचालयों की हालत देखने के बाद आप भी यही कहेंगे। यहां पूर्व प्रधान के कार्यकाल में आवंटित हुए 325 में से 125 शौंचालय ही चालू हालत में मिले। शेष शौंचालयों में से किसी में छत नहीं है, किसी में दरवाजे और दीवार नहीं तो किसी में शीट ही नहीं है। बड़ी बात तो यह है कि शौंचालय बनवाने के लिए आने वाली राशि लाभार्थियों के खाते में नहीं आई, फिर भी रिकॉर्ड के लिए अधूरे शौंचालय बनवा दिए गए। यह राशि फिर किसके खाते में आई। जब ग्रामीणों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सेक्रेटरी ने दूसरी क़िस्त भी निकलवा ली, जबकि लाभार्थी के हाथ न तो राशि लगी और न ही शौंचालय पूर्ण हो पाए। 1 वर्ष भी पूर्ण न होने पर भी कुछ शौंचालयों की छत गिर गई तो कुछ की दीवारें। कुल मिलाकर इज्जतघर में अब लोगों को अपनी इज्जत बचाना मुश्किल हो गया है। घरों की इज्जत कही जाने वाली महिलाओं को घर से दूर शौंच के लिए न जाना पड़े इसीलिए सरकार द्वारा शौंचालय बनवाए जा रहे हैं और उसके लिए लाभार्थियों के खातों में धनराशि भेजी जा रही है लेकिन यहां मामला कुछ और ही है। न तो धनराशि लाभार्थियों को मिली और न ही शौंचालय। “सबका साथ, सबका विकास“ स्लोगन पर यह हकीकत एक बदनुमा धब्बा है तो फिर क्या इस गैरजिम्मेदाराना हरकत पर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में जाकर धूल फांककर सरकारी फाइलों में दफन हो जाएगा। 


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