हरदोई, : मिठनापुर की गौशाला में भूख प्यास से तड़प रहे बेजुबान

 

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चार दर्जन गौवंशो की सुरक्षा में एक चैकीदार 

शाहाबाद। प्रदेश सरकार की कमान योगी जी ने सँभालते ही गौवंशो की सुरक्षा के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में गौशालाओं के निर्माण का खाका खींचकर गऊ माता को संरक्षित करने का जो संकल्प लिया था वह अधूरा ही रह गया है।हालांकि सरकार लगातार कोशिश करती रही कि गौवंशों का कहीं से अहित न हो परंतु हकीकत में ऐसा नहीं हो पाया। तहसील क्षेत्र में बनबाई गयीं 8 गौशालाओं मे आवारा गोवंशों को रखने का आदेश यूपी सरकार द्वारा जारी किया गया था।स्थानीय प्रशासन ने गौवंश को पकड़कर गौशालाओं में गौवंशों को भेजने की कार्यवाही शुरू की थी परंतु  सरकार में बैठे उच्च अधिकारियों को ये नहीं पता था कि ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम प्रधानों के द्वारा गौशालाओं की देखरेख में बड़ी लापरवाही की जा रही है।ऐसा भी नही कि प्रदेश सरकार द्वारा इस पुनीत कार्य के लिए बड़ा बजट भी दिया जाता रहा है।फिर भी सरकारी पैसों पर ऐश करने वाले जिम्मेदारों द्वारा सत्ता का इस्तेमाल कर बेजुबानों के हक को भी डकारने से नहीं चूकते हैं। ब्लाक शाहाबाद की ग्राम पंचायत मिठनापुर में बनी गौशाला में कुछ ऐसा ही नजारा सोमवार को देखा गया जब गौशाला में दो गोवंश मरणासन्न अवस्था में पड़े मिले। गौवंशों की रक्षा करने वाले यहां रक्षक और संरक्षक द्वारा यहां परिस्थितियां उलट दिखीं।लोगों ने दबी जुबान से ये बताया कि यहां गोवंशओं की दयनीय स्थिति है। यदि उचित देखभाल होती तो गायों की ना होती। गोवंशों को खाने वाली चन्नी में पीने हेतु साफ पानी व खाने के लिए हरा चारा तो दूर की बात भूसा तक नहीं दिखा। कुल मिलाकर यह गोवंशों के संरक्षण हेतु बनी गौशाला की मौजूदा हालत दयनीय है।


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