छलावा साबित हो रहे ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय

 


जिम्मेदारों की बंदरबांट नीति के चलते अधूरे पड़े सामुदायिक शौचालय

शाहाबाद हरदोई। शासन की मंशा थी कि प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण हो। ताकि किसी भी परिवार को शौच के लिए खुले में न जाना पड़े। शासन की प्राथमिकता में शामिल इस योजना के तहत निर्मित कराए गए शौचालयों के नाम पर प्रधान, सचिव से लेकर अधिकारियों द्वारा खुलकर मनमानी की गई। ब्लाक की ग्राम पंचायत रामपुर हृदय में बने सामुदायिक शौचालय में दीवाल खड़ी कर व बाहर रंग-रोगन करके चमका दिया गया लेकिन अंदर काम अधूरा पड़ा है। गांव में बने सामुदायिक शौंचालय का लाभ ग्रामीण नही उठा सके। रामपुर हृदय में बने सामुदायिक शौंचालय के गड्ढे भी आधे-अधूरे पड़े हैं,पानी की टंकी प्रधान द्वारा उखाड़कर अपने घर रख ली गई तथा सामुदायिक शौंचालय को बंद करके चाभी भी पूर्व प्रधान विनोद कुमार गुप्ता ने अपने पास रख ली। बताते चलें कि ग्राम पंचायत रामपुर ह्रदय में सामुदायिक शौचालय का निर्माण करीब एक वर्ष पहले शुरू कराया गया था तथा निर्माण के नाम पर जमकर की गई।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का बंदरबांट किया जा चुका है। ब्लॉक के अधिकांश सामुदायिक शौचालयों का यही हाल है। ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की जड़ बहुत गहरी है। यहाँ तक की ऊपर तक बैठे अधिकारियों तक बंदरबांट की बात से साफ इंकार नही किया जा सकता। इसके अतिरिक्त इन्ही बन्द पड़े सामुदायिक शौचालयों में 06 हजार रुपये वेतन पर केयर टेकर नियुक्तियां भी हो चुकी हैं आखिर जब शौंचालय कभी ग्रामीणों के लिए खुला ही नही तो साफ-सफाई के नाम पर 6000 रुपये आखिर किसके पास जा रहे है यह सोचनीय प्रश्न है।


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