आतंकियों के निशाने पर थी राम जन्मभूमि

 


लखनऊ में अरेस्ट आतंकियों ने की थी राम मंदिर की रेकी, नए लड़कों का दस्ता तैयार कर फिदायीन धमाकों की साजिश रची

  • AGH का कमांडर शकील है फरार, 15 अगस्त के लिए बना रहा था मानव बम; मिनहाज और मसीरुद्दीन 14 दिन की रिमांड पर भेजे गए
  • UP में सीरियल ब्लास्ट की फिराक में था अलकायदा, 5 जिलों से ATS ने आतंकियों से जुड़े 23 संदिग्ध स्लीपिंग मॉड्यूल उठाए
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को गिरफ्तार किए गए अलकायदा की विंग अंसार अलकायदा हिंद (AGH) के आतंकी मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर को ATS ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। दोनों से पूछताछ में कई अहम खुलासे भी हुए हैं।

    IB की रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर पर फैसला आने के बाद से ये आतंकी सीरियल ब्लास्ट की साजिश रच रहे थे। इसी लिए अल कायदा का ये मॉड्यूल खड़ा किया गया। इसके लिए पहले नए लड़के भर्ती किए गए, फिर उन्हें फिदायीन दस्ता के लिए तैयार किया गया। इन्हें कम पैसे में बम बनाने के लिए भी प्रशिक्षित किया गया। यह भी पता चला है कि दस्ते में शामिल 7 लड़कों ने दो साल पहले अयोध्या में बाइक से घूमकर राम जन्म भूमि की रेकी भी थी।

    ATS ने सोमवार दोपहर दोनों को लखनऊ के स्पेशल कोर्ट में पेश किया। जहां ATS ने रिमांड अर्जी दाखिल की। जिसे अपर जिला जज-3 कोर्ट के जस्टिस राम योगेंद्र गुप्ता ने स्वीकार कर लिया।

    आतंकियों का कमांडर शकील फरार
    इससे पहले मिनहाज और मसीरुद्दीन से पूछताछ में ATS को अहम सुराग हाथ लगे हैं। यूपी में अल कायदा के आतंकी बड़ी साजिश की फिराक में थे। ATS का दावा है कि दोनों 15 अगस्त को सीरियल ब्लास्ट और मानव बम बनकर देश को दहलाने की साजिश रच रहे थे। इन दोनों को AGH का यूपी कमांडर शकील ऑपरेट कर रहा था।

    ATS को रविवार को लखनऊ के दुबग्गा में आतंकियों के होने का इनपुट मिला था। लेकिन घेराबंदी से पहले शकील भाग निकला। मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन पकड़ में आए थे। ATS शकील की तलाश कर रही है।

    कानपुर में ATS की कार्रवाई, 6 हिरासत में लिए गए
    UP ATS ने कानपुर में बड़ी कार्रवाई की है। यहां ATS ने आतंकियों के एक साथी इरशाद समेत 6 लोगों को हिरासत में लिया है। सूत्रों का कहना है कि इरशाद 15 अगस्त को होने वाले सीरियल ब्लास्ट में मिनहाज और मसीरुद्दीन की मदद कर रहा था। जबकि पेचबाग का रहने वाला लईक और एक अन्य कैरियर हैं। रिहाइशी इलाके में रहने वाले ये सभी स्लीपर सेल हैं। यूपी कमांडर शकील का इशारा मिलते ही बम और असलहे तय जगह पर पहुंचाने वाले थे।

  • शकील ने ब्लास्ट की बना ली थी प्लानिंग
    ATS ने बीते 24 घंटे में शकील की तलाश में लखनऊ, कानपुर, मेरठ, देवबंद और बाराबंकी में छापेमारी की है। मिनहाज व मसीरूद्दीन से मिले इनपुट से साफ है कि इन लोगों के निशाने पर प्रदेश के प्रमुख मंदिर, स्मारक, रेलवे स्टेशन और 15 अगस्त के कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले राजनेता व पुलिसकर्मी थे। इन लोगों ने पूरे प्रदेश में करीब दर्जन भर स्थानों की निशानदेही कर सीरियल ब्लास्ट करने की योजना बना ली थी। इसके लिए इनके स्लीपिंग माॅड्यूल्स पूरी तरह से सक्रिय हो चुके थे।

    सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदेश में 23 संदिग्ध उठाए
    सुरक्षा एजेंसियां कानपुर, सहारनपुर और लखनऊ से करीब 23 स्लीपिंग माड्यूल्स को उठाकर पूछताछ कर रही है। साथ ही मिनहाज, मसीरूद्दीन के परिवार वालों से इनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक यह लोग आसपास के सुनसान इलाकों में नवयुवकों को रेडिक्लाइज कर जेहाद के लिए तैयार कर रहे थे। उनसे मिलने वाले युवाओं का भी पता लगाया जा रहा है।

    जेल में बंद आतंकियों के रिश्तेदारों पर भी नजर
    ATS ने जेल में बंद आतंकियों के रिश्तेदारों पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है। मार्च 2017 में एटीएस मुठभेड़ में मारे गए कानपुर के सैफुल्ला के साथी गौस मुहम्मद, दानिश व आतिफ अभी जेल में हैं। वहीं, कानपुर में गिरफ्तार असम का कमरुद्दीन भी जेलउमर हल्मडी पाकिस्तान बार्डर से आपरेट कर रहा है ग्रुप

    एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने बताया कि खुफिया को इनपुट मिला था कि दुबग्गा क्षेत्र में मिनहाज, शकील व मसीरुद्दीन यूपी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं। एटीएस टीम की धरपकड़ में शकील के मौके से भाग निकलने की बात सामने आई है।

    यह AGH आतंकी संगठन को लीड कर रहा था। जिसे भारत-अफगानिस्तान बॉर्डर पर उमर हलमंडी आपरेट कर रहा है। अभी तक इसे यूपी संभल का आसिम उमर चला रहा था। जिसकी सितंबर 2019 को मौत हो गई थी। इस गिरोह को सितंबर 2014 को इंडिया में आतंकी गतिविधियां संचालित करने के लिए अल जवाहरी ने शुरू किया था। हलमंडी ने ही शकील व मिनहाज के साथ गिरोह को यूपी में खड़ा किया था।

    भटकल के अलकायदा से रिश्ते बिगड़ने से भी मिशन पर पड़ा असर
    इंडियन मुजाहिद्दीन की कमान संभालने वाले भगोड़ा यासीन भटकल लंबे समय तक अलकायदा के लिए काम करता रहा। मगर अफगानिस्तान में अलकायदा के विस्तार में उसे जगह न मिलने से उसने ISIS का दामन थाम लिया था। इसके बाद मिशन की यूपी में अलकायदा की एंट्री हुई। उमर हलमंडी अलकायदा का नया मॉड्यूल तैयार कर नए युवाओं की भर्ती कर रहा था। इन युवकों की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान और कश्मीर के बॉर्डर पर संचालित कैंप में भेजा जा रहा था। पकड़ा गया मिनहाज 3 बार इस कैंप में जा चुका था।

    सीरियल ब्लास्ट की साजिश का 2 साल पहले ही हुआ था खुलासा
    दिसंबर 2019 में राम मंदिर फैसले के बाद UPSTF(उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स) ने कुख्यात आतंकी जलीस अंसारी उर्फ डॉ. बम को कानपुर में गिरफ्तार किया था। तभी इस साजिश का खुलासा हो गया था। पेरोल तोड़कर भागे जलीस ने बताया था कि CAA(नागरिकता संशोधन कानून) और राममंदिर फैसले को लेकर आतंकी संगठनों में आक्रोश है। इसलिए यूपी में सीरियल ब्लास्ट की तैयारी चल रही है। उसने यह भी बताया था कि यक एक बहुत बड़ा मिशन है, जिसे सरकार नहीं रोक सकती। इसे अंजाम देने के लिए यूपी के हर जिलों में फिदायीन तैयार हो रहे हैं। इन फिदायीनों को बम बनाने की तकनीकी सिखाने के लिए ही वह पेरोल तोड़कर कानपुर पहुंचा था।

    बम बनाने के मास्टरमाइंड से पूछताछ के लिए अजमेर जेल पहुंची टीम
    दुनिया के 10 सबसे खूंखार आतंकियों में शामिल डॉ. बम अजमेर जेल में बंद है। उसके साथ बाबरी मस्जिद विध्वंस के विरोध में 1993 में देश भर में ब्लास्ट करने में शामिल रहा रायबरेली का प्रोफेसर हबीब अहमद, लखनऊ के नक्खास निवासी डॉ. मुहीउद्दीन जमाल अल्वी और मुंबई का अब्रे रहमत अंसारी भी अजमेर जेल में हैं। 1983 में मुंबई से MBBS करने वाले जलीस अंसारी को दुनिया के सबसे सस्ते और घातक बम बनाने की विधियां मालूम है। उसके पास मिली डायरी में बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले 600 से ज्यादा रसायनों की लिस्ट थी। वह जेल के अंदर से इन संगठनों को हैंडल करता है। 1993 के सीरियल ब्लास्ट की योजना जलीस और हबीब ने जमाल अल्वी के नक्खास स्थित घर पर ही बैठकर तैयार की थी। जलीस अंसारी ने बम बनाने की शुरुआती विधियां बुलंदशहर के आतंकी अब्दुल करीम टुंडा से सीखी थी। राजस्थान ATS की टीम अजमेर जेल में बंद जलीस और उसके साथियों से पूछताछ कर रही है।

    बाइक से घूमकर 7 संदिग्धों ने दो साल पहले की थी अयोध्या की रेकी
    जलीस अंसारी के कानपुर में पकड़े जाने के कुछ महीने पहले अयोध्या पुलिस ने 7 संदिग्धों को पकड़ा था। इसमें राजस्थान और नेपाल से सटे तराई इलाके के युवक शामिल थे। यह बाइक से घूमकर यूपी के धार्मिक स्थलों की रेकी कर रहे थे। इनके पास से कई धार्मिक स्थलों का नक्शा भी मिला था। कई दिनों तक इनसे पूछताछ चली। मगर आतंकी कनेक्शन का कोई ठोस सुबूत न मिलने की वजह से इन्हें छोड़ना पड़ा था। कुछ दिन बाद बनारस में ISI का एजेंट चंदौली निवासी राशिद अहमद पकड़ा गया। फिर पता चला कि अयोध्या में पकड़े गए युवक रेकी करने के लिए ही भेजे गए थे।

    इंडियन मुजाहिद्दीन के फाइनेंसर अब्दुल कायम की तलाश तेज

    जलीस अंसारी ने बताया था कि कानपुर के फेथफुलगंज निवासी सगे भाई रहमान और अब्दुल कयूम इंडियन मुजाहिद्दीन के फाइनेंसर थे। हैंडलूम कारोबारी रहमान की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। जलीस की गिरफ्तारी के बाद कयूम मस्कट भाग गया था। जहां उसे एक सरकारी विभाग में ट्रांसलेटर की नौकरी मिल गई थी। जलीस अयूब से ही मिलने के लिए कानपुर पहुंचा था। अब लखनऊ से दो आतंकियों के पकड़े जाने के बाद कानपुर कनेक्शन फिर सामने आया तो कयूम की तलाश तेज हो गई है।में ही है। उससे जुड़े करीब दर्जन भर लोग एटीएस की रडार पर है। जिनका इन लोगों से कभी न कभी संपर्क रहा था और इनसे मिले भी थे।

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