कोरोना काल में व्यसायिकरण पर उतरा आर के एशियन पब्लिक स्कूल

 


स्कूल में चल रहा कथित शिक्षक घोटाला

इण्टर कालेज की तरफ देना होगा अधिकारियों को ध्यान

सीतापुर। कोरोना काल में जहंा अवसरवादियों की कमी नही है वहीं खरबूजे को देखकर खरबूजे के रंग बदलने वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए स्कूलों द्वारा भी शिक्षा को व्यवसाय बना दिया गया हैं। मानक के अनुरूप शिक्षको को भी नही रखा जा रहा है। अब यह सब कैसे हो रहा है इसकी जांच बेहद जरूरी है। सूत्रो का कहना है कि वैसे तो शहर के कई स्कूल चर्चित है लेकिन यह स्कूल लगातार चर्चाओं से गुजर रहा है बताया यह भी जा रहा है कि स्कूल के  संचालक द्वारा पूरी तरह से शिक्षा माफिया के तौर पर उतर आया है और एक और स्कूल जो बंद होने की कगार पर है उसको चलाने की लिये सेटिंग व सौदेबाजी कर रहा है सौदा तय हुआ या नही इस बात की जानकारी नही है लेकिन बताया जा रहा है कि सकूल का संचालक बंद हो रहे हिन्दी मीडियम स्कूल का नाम बदलकर फैन्सी व भौकाली नाम रखकर बंद हो रहे स्कूल में बड़ी आमदनी का जरिया तलाश रहा हैं। हलांकि अभी तक यह स्कूल पूरी तरह से संचालक के कब्जे में नही आया है। क्या कारण है लोग तरह तरह की अफवाहे उड़ा रहे है लेकिन इस संचालक पूरी तरह से शिक्षा माफिया हो गया है इसकी चर्चा होने के साथ ही सूत्रो का दावा भी है। सूत्रो द्वारा दावा यहां तक किया जा रहा है कि स्थानीय मुंशीगंज पानी टंकी निकट सहसापुर में खुले आर के एशियन पब्लिक स्कूल हो अब इण्टर तक हो चुका है इसमें मानके अनुसार शिक्षको को नही रखा गया है। संचालक द्वारा अपनी आय का जरिया बढ़ाने के लिये छात्रों के  भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं। मानके के अनुसार शिक्षको की तैनाती तक नही है केवल कागजी लिखा पढ़ी ही इस स्कूल द्वारा फिट की जा रही है। क्या अब सीतापुर में शिक्षा पर शिक्षा माफिया भारी पडेगे? क्या शिक्षा का स्तर इतना गिर जायेगा की मां सस्वती के मंदिर में लक्ष्मी माता की खोज की जायेगी शिक्षा अनमोल होती है लेकिन उक्त स्कूल जैसे संचालक अब शिक्षा का भी मोल वसूलने लगे है। सूत्रो द्वारा दावा किया जा रहा है कि स्कूल में जो शिक्षक तैनात है और सीनियर सेक्शन को  पढ़ा रहे है उन शिक्षको की पड़ताल करनी बहुत जरूरी है क्याकि जब गुरू ही योग्य नही होगा तो ऐसे हालातों में वह छात्रो का भविष्य कैसे संभाल पायेगा फिलहाल तो स्कूल का प्रबन्ध तंत्र चर्चाओं के दौर से गुजर रहा है और मांग उठने लगी है कि स्कूल के संविधान जिसके आधार पर स्कूल का रजिस्ट्रेशन हुआ है यह स्कूल उस संविधान पर खरा नही उतर रहा है। जिन नियमों को स्वयं स्कूल के प्रबन्ध तंत्र ने बनाया लेकिन धन की लालषा रखने के कारण आज यह स्कूल अपनी ही बनाये गये नियमों पर खरा  नही उतर रहा है इसकी भी जांच किये जाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि पैसा करने के तमाम साधन है शिक्षा के साथ खिलवाड़ करना उचित नही है। 


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