भावी पीढ़ी का सुरक्षित भविष्य हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए - विश्व के न्यायविद्ों व कानूनविद्ों की राय


 लखनऊ,
17 जुलाई। सिटी मोन्टेसरी स्कूल द्वारा आज ‘विश्व न्याय दिवस’ के अवसर पर विश्व के न्यायविद्ों व कानूनविद्ों का एक दिवसीय आॅनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 27 देशों के न्यायविद्ों व कानूनविद्ों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए एक स्वर से कहा कि भावी पीढ़ी को सुरक्षित व सुखमय भविष्य प्रदान करना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और इस उद्देश्य हेतु विश्व के न्यायविद्ों व कानूनविद्ो का आगे आकर अन्तर्राष्ट्रीय परिचर्चा में संवाद करना एक अहम कदम है, जो कोरोना महामारी के इस दौर में व इसके उपरान्त नवीन विश्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। यह अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कोरोना महामारी के दौर में विश्व में न्याय, शान्ति, सुरक्षा व मानवता का कल्याण’ विषय पर आयोजित हुआ, जिसमें 27 देशों के न्यायविद्ों व कानूनविद्ों ने आॅनलाइन प्रतिभाग कर कोरोना महामारी के बाद की वैश्विक विश्व व्यवस्था पर विशेष रूप से चर्चा-परिचर्चा की। यह अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन प्रातः 10.30 बजे से प्रारम्भ होकर शाम 6.00 बजे तक तीन अलग-अलग सेशन्स में सम्पन्न हुआ।

इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन फिजी आइसलैण्ड के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री कमल कुमार ने किया। इस अवसर अपने संबोधन में न्यायमूर्ति श्री कमल कुमार ने कहा कि विश्व के ढाई अरब बच्चों को सुरक्षित भविष्य का अधिकार दिलाना एक ऐसा मुद्दा है जो विश्व में एकता, शान्ति व सौहार्द की स्थापना से ही संभव है। इससे पहले, सम्मेलन के संयोजक डा. जगदीश गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् व संस्थापक, सी.एम.एस., ने सम्मेलन में प्रतिभाग कर रहे देश-विदेश की गणमान्य हस्तियों, न्यायविद्ों व कानूनविद्ों का हार्दिक स्वागत अभिनंदन किया। इस अवसर पर डा. गाँधी ने कहा कि बच्चों के आधिकारों व विश्व व्यवस्था के महत्वपूर्ण मुद्दे पर आवाज उठाने के लिए मैं विश्व के न्यायविद्ों, कानूनविद्ों व अन्य गणमान्य हस्तियों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। यह हमारी इण्टर-जनरेशन रिस्पान्सिबिलटी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर जीवन व बच्चों को सुरक्षा प्रदान करें। 

सम्मेलन में बोलते हुए आर्मीनिया के कोर्ट आॅफ काॅसेसन की प्रेसीडेन्ट न्यायमूर्ति रूजाना होकोब्यान ने कहा कि कोरोना महामारी की समस्या सभी सभी देशों में एक समान व्याप्त है, हमें इसे मिलकर सुलझाना है। आपसी झगड़ों को मिटाकर हमें शान्ति व सद्भावना का वातावरण तैयार करना चाहिए। जापान के बयाको शिनो काई की चेयरपरसन सुश्री मसामी सायोनिजी ने कहा कि हम सबके अन्दर ईश्वरीय शक्ति है। इसी से हम किसी भी आपदा का सामना कर सकते हैं, बस हममे एक-दूसरे की मदद करने का हौसला होना चाहिए। भूटान हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोबजैंग रिंजिंग यार्गे ने कहा कि आज न्याय दिवस है। न्याय से ही आदमी महान बनता है। आज कोविड-19 के समय में सभी देशों को एकजुट होकर शान्ति व न्याय की आवाज उठानी चाहिए। 

सम्मेलन के अपरान्हः सत्र का शुभारम्भ सी.एम.एस. के चीफ एक्जीक्यूटिव आॅफीसर श्री रोशन गाँधी के स्वागत भाषण से हुआ। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री रोशन गाँधी ने कहा कि इस वर्ष की स्थितियाँ विगत वर्षों से काफी भिन्न हैं। अब समय आ गया है कि हम ग्लोबल गवर्नेन्स के बारे में गंभीरता से सोचें। सम्मेलन में फलीपीन्स के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिलेरियो डेविड जूनियर, अफगानिस्तान के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री यूसुफ हलीम, मिश्र के सुप्रीम कान्स्टीट्यूशनल कोर्ट के डेप्युटी चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति श्री आदेल उमर शेरिफ, बोस्निया एण्ड हर्जेगोविना की न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुश्री मिरसादा डिजिंडो, इस्वातिनी के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मूसा सी. बी मफलाला, मोजाम्बिक के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एडेलिनो मुचांगा व अन्य गणमान्य हस्तियों ने अपने विचार व्यक्त किये। सम्मेलन में सी.एम.एस. की संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने भी अपने विचार व्यक्त किये जबकि सी.एम.एस. प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन ने सम्मेलन की सफलता हेतु सभी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हार्दिक आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का संचालन श्री शिशिर श्रीवास्तव, हेड, इण्टरनेशनल रिलेशन्स, सी.एम.एस., श्री संदीप श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट लीडर, विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन, सी.एम.एस. ने किया जबकि उद्घोषिका की भूमिका सी.एम.एस. के इंग्लिश स्पोकेन विभाग की हेड श्रीमती वीरा हजेला एवं सी.एम.एस. जाॅपलिंग रोड कैम्पस की प्रधानाचार्या श्रीमती शिप्रा उपाध्याय ने निभाई।


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