इस बेबस माँ और मासूम बच्ची को मदद की दरकार!



कागजों तक सीमित हैं सरकारी योजनाएं, धरातल पर तस्वीर ऐसी है...

हरदोई। महिलाओं व बेटियों के उत्थान के लिए केंद्र व राज्य सरकार तमाम योजनाएं संचालित कर रही है, पर धरातल पर ये योजनाएं कितना क्रियाशील हैं इसकी तस्वीर हम आपको दिखा रहे हैं। जिला मुख्यालय पर लावारिस अवस्था में पड़ी इस बेसहारा महिला और उसकी मासूम बेटी ने सिस्टम की पोल खोल दी है।

घरेलू हिंसा की शिकार ये महिला पिहानी के बूढ़ागांव की निवासी है। यहां के विनोद पुत्र शिवराम करीब 10 वर्ष पूर्व बिहार के पटना शहर से परमिला को लाया था। उसके दो बेटियां पूजा (07 वर्ष) व भारती (04 वर्ष) हैं। शादी के बाद विनोद मारपीट करने लगा। कई बार उसे घर बाहर किया। करीब 05 वर्षों से वह लगातार घरेलू हिंसा की शिकार है। बड़ी बेटी अपने ननिहाल में रह रही है, जबकि छोटी बेटी माँ की बेबसी के साथ अपना बचपन बर्बाद कर रही है।

परमिला ने बताया कि उसका पति कटरा (शाहजहांपुर) में प्राइवेट नौकरी करता है। यहां उसके ससुर, जेठ आदि भगाने के लिए उसके साथ आये दिन मारपीट करते हैं। उसे रस्सी में बांधकर मारा गया, इस दौरान उसके दांत भी टूट गए थे। न्याय के लिए वह कई सालों से चक्कर लगा रही है। पिहानी थाने से लेकर महिला थाना, एसपी दफ्तर आदि कार्यालयों में उसे न्याय नही मिला। बेबस माँ और उसकी मासूम बेटी अब अपनी किस्मत पर आंसू बहा रही है। कहने को तो सरकार ऐसी महिलाओं व बेटियों के उत्थान के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, पर ऐसी बेसहारा माँ और मासूम बेटियों तक ये योजनाएं कभी नही पहुंचती हैं।

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