हरदोई: तीन गुटों में बंटी सपा की साइकिल, क्या चल पाएगी ?


 शाहाबाद 
हरदोईसपा मुखिया अखिलेश यादव के निर्देश पर हर विधान सभा में भाजपा की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ सपा नेताओं को तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने और ज्ञापन देने के निर्देश दिये गये थे। लेकिन शाहाबाद में सपा 3 गुटों में बंटी नजर आई। एक खेमा पूर्व विधायक आसिफ खां बब्बू तो दूसरा खेमा पूर्व विधायक बाबू खां के पुत्र सरताज तो तीसरा खेमा नवोदित सपा नेता मुजीब खान के नेतृत्व में किया गया। पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने प्रत्येक विधानसभा पर भाजपा सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन देने के निर्देश दिए थे। उसके उलट शाहाबाद  विधानसभा में पूर्व विधायक आसिफ खां ने अपने आवास पर सैकड़ों लोगों के साथ भाजपा सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला तो वही शाहाबाद स्थित पूर्व विधायक बाबू खान के आवास पर उनके पुत्र सरताज खा ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा सरकार पर तमाम भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए संबोधित किया। तो वही सपा नेता मुजीब खान ने भी अपने आवास पर सपाइयों की भीड़ इकट्ठे कर भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला और ज्ञापन देने के लिए जैसे ही निकले तो जामा मस्जिद चैकी पर उन्हें पुलिस ने रोक लिया और वहीं पर ज्ञापन लेने के लिए दबाव बनाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम ने ज्ञापन लेकर सपाइयों को वापस अपने आवास पर जाने के निर्देश दिए। वही बब्बू अपने आवास से चन्द कदम दूर ही निकल पाए थे कि पुलिस ने उन्हें रोक लिया और एसडीएम सौरभ दुबे वहां पहुंच कर ज्ञापन लिया। ज्ञापन के समय किसी भी सपा नेता की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वह तहसील तक जाता और एसडीएम को ज्ञापन सौंपता। इस दौरान तीनों सपा नेताओं की करतूत और कार्यशैली जनता जनार्दन ने अपनी आंखों से देख ली कि उनका रहनुमा कौन बन सकता है और किसे वोट देना चाहिए ऐसी स्थिति में जब सपा नेता पूर्व विधायक आसिफ अली और पूर्व  विधायक बाबू खां के पुत्र  सरताज खान और सपा नेता मुजीब खान यह तीनों अपने घर के इर्द गिर्द ही कैद रहे। तो आम आदमी की आवाज उठाने वाला आखिर कौन सा ऐसा नेता है जिसकी शरण में शाहाबाद विधानसभा की जनता जाए और अपना दर्द बयां कर सके।


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