..और जब बच्चों को फिर से मिल गया पिता का साया


 सीतापुर ।
शादी के तीन वर्ष तक सब ठीक-ठीक रहा और फिर मामूली कहासुनी से राजेपारा निवासी संदीप और खुश्बू के रिश्ते में खटास आ गई। विवाद बढ़ा तो मामला न्यायालय तक पहुंच गया। दो वर्ष अलग रहे तो एक-दूसरे की अहमियत पता चली। बच्चे को भी पिता की कमी खलने लगी। बिखरे रिश्तों को समेटते हुए संदीप और खुश्बू ने एक साथ रहने का मन बना लिया। लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के बाद दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़कर घर चले गए। संदीप और खुश्बू के दो बच्चे हैं। एक चार वर्ष का है और दूसरा दस माह का। विवाद खत्म होने के बाद संदीप व खुश्बू ने सिर्फ इतना कहा. अब साथ रहेंगे और बच्चों की परवरिश अच्छे से करेंगे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित लोक अदालत में खुश्बू व संदीप की तरह कई अन्य जोड़ों ने आपसी सुलह-समझौता कर एक साथ रहने की ठानी। लोक अदालत में मोटर दुर्घटना, आपराधिक शमनीय वाद, राजस्व व सिविल वाद निस्तारित किए गए। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुदेश कुमारी ने बताया कि, लोक अदालत में वादों का निस्तारण कोविड नियमों का पालन करते हुए किया गया। मोहद्दीनपुर निवासी रज्जन व पत्नी मोहिनी भी अब एक साथ रहेंगे। लोक अदालत में सुलह-समझौते के बाद वह दोनों तीन वर्ष के बेटे शौर्य का हाथ थामकर घर गए। रज्जन व मोहिनी के दो वर्ष से विवाद चल रहा था। मोहिनी, बेटे को लेकर मायके में रह रही थी और रज्जन अकेले अपने घर में थे। बेटे की परवरिश व टूटे रिश्तों को संवारने के लिए दोनों ने एक साथ रहने का वादा किया, वहीं बेहटा पकौड़ी निवासी इकबाल व नसरीन ने विवाद खत्म कर एक-दूसरे से अलग रहने का समझौता किया। कोविड से बचाव को लेकर कई बैंकों ने अपने स्टाल शाखाओं में ही लगाए। बैंक संबंधी वादों का निस्तारण किया गया। न्यायालय परिसर में लगे यूको बैंक के स्टाल पर 16 मामले निपटाए गए।


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