तमाशा बनकर रह गये पंचायत के उप चुनाव


 कहीं आरओ नियमो पर पड़ रहे भारी तो कहीं लगाई जा रही मृतको की डियूटी

 आखिरी  ऐसी बड़ी लापरवाहियों परं खामोश क्येा है प्रशासन

सीतापुर। त्रिस्तरीय उप चुनाव केवल तमाशा बनकर रह गये है। अधिकारियेां द्वारा जो खेल खेला जा रहा है बेहद घिनोना है और लोगो के दिलो में चुनाव को नफरती बना रहा है। क्या चुनाव ऐसे होते है कहीं उप चुनाव में मुर्दो की डियूटी लगा दी जाती है जो शिक्षक कई वर्ष पहले मर चुके है उनकी तैनाती शिक्षा विभाग चुनाव डियूटी में कर रहा हैं। जो भी इस बात सुनकर रहा वह चुनाव का ही माखौल उडा रहा है हर युवक की जुबान पर है कि वाह रे चुनाव सीतापुर के त्रिस्तरीय चुनाव में की निगरानी भूत कर रहे है। जो लोग कई वर्ष पहले मर चुके है उनकी डियूटी चुनाव में लगा दी गयी। अब जो मर चुके है उनकेा अधिकारी जिन्दा करके उनसे चुनाव की डियूटी कैसे करवा सकते है। इतनी बड़ी लारपरवाही पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का यह कहना कि कागजात अपडेड नही थे इस कारण यह गलती हो गयी अब कागजो को अपडेटकरवा लिया जायेगा और मामले को शांत कर दिया गया। वहीं दूसरे और उप चुनाव में आर ओ चुनाव आयोग से भी ऊपर साबित हो रहा है। यहां भी चुनाव केवल मजाक बनकर रह गया है बाकी सब अधिकारियों की मनमानी चल रही है। अगर इसी तरह चुनाव को तमाशा बनाना है तो जनता की गाढी कमाई को चुनाव पर क्यो फूंका जा रहा है। ऐसे ही पदाधिकारियों को मनोनीत कर देना चाहिए ताकि जनता का पैसा ही बच सके। आज जनता एक एक पैसे के लिये मोहताज है शाम को सब्जी खरीदने के लिये जनता को अपनी जेब देखनी पड़ रही हैं। मध्यम वर्ग की सुने तो बीमार पुत्र एक सेब की मांग कर रहा है लेकिन कोरोना काल में खाली हेा जेब के कारण एक पिता अपने पुत्र को एक सेब तक नही खिला पा रहा है। ऊपर से लेकर नीचे तक तमाशबीन बैठे हुए है वह केवल अपनी जेबो का वजन तौलना जानते है और अपनी व अपने परविार की जिन्दगी विलासिता भरी जी है बाकी एक लाचार पिता पर किसी भी अधिकारी को तरस नही आ रहा है। सेब का भाव ढाई सौ रूपये किलो है ऐसे में मध्यम वर्ग का एक पिता अपने बीमार पुत्र को एक सेब तक नही दे पा रहा है। यह है उत्तर प्रदेश की व्यवस्था। अधिकारी माल काट रहे है और जनता आंसू बहा रही है यह इसे ही सिस्टम कहते है अगर ऐसा है सिस्टम में केवल बेइमानी और मक्कारी है तो बंद कर देना चाहिए ऐसा सिस्टम। आखिर जिम्मेदार अधिकारी चाह क्या रहे हेै सीतापुर में दो बड़े खुलासे हो चुके है उन पर अधिकारी चुप्पी साधे बैठे है कायदे में चुनाव आयोग को कुछ करना चाहिए क्येाकि आर ओ द्वारा चुनाव आयेाग के सभी सिस्टमो को फेल किया जा रहा है और आर ओ के सामने चुनाव आयोग के नियम कोई मायने ही नही रख रहे है ऐसे में जब आर की मनमानी चल रही है तो चुनाव आयेाग का औचित्य ही क्या रह गया है? कहीं चुनाव डियूटी में भूत लगाये जा रहे तो कही आर ओ की मनमानी चल रही है और आयेाग से लेकर जिम्मेदार अधिकारी शांत बैठे है जनता लुट रही है अवसरवादी जनता की जेबो पर भारी पड़ रहे है आम इंसान परेशान है तो अवसर वादी अधिकारी और व्यापारी कोरोना महामारी में अपना अवसर खोज रहे है। त्रिस्तरीय उप चुनाव पर  नजर डाली जाये तो पता चलता है कि ऐलिया विकास खण्ड के वार्ड नम्बर आठ पर उप चुनाव होने थे। वार्ड नम्बर आठ के उप चुनाव में दो दावेदार थे। एक दावेदार का पर्चा निरस्त हो गया बताया गया कि पर्चे में कमी थी। इस कारण जब दावेदार एक ही बचा तो उसको निविर्रोध नियुक्त कर दिया। अब आर अरविन्द मिश्रा ए आरओ पर दबाव बना रहे है कि दूसरे प्रत्याशी की फाइल डालकर चुनाव करवाओं और प्रतीक चिन्हो का वितरण करो जबकि समय निकल चुका है और आयोग के कानून भी ऐसा करने की इजाजत  नही दे रहे है इसके बाद भी आर ओ श्री मिश्र इस तरह का दबाव एआरओ पर बना रहे हैं एआरओ परेशान है क्यो वह ऐसा किस नियम के आधार पर करे। आर ओ श्री मिश्रा ने उप चुनाव को तमाशा बना दिया है इससे बड़ी बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बनकर तमाशा देख रहे है। दूसरे मामला पिसावां ब्लाक का है यहां पर भी उप चुनाव होने थे चुनाव आयोग की मंशा के अनुसार हो इसका इतना बड़ा ध्यान रखा गया कि उप चुनाव में मुर्दो को तैनात कर दिया। शिक्षा विभाग ने उन कर्मचारियों की डियूटी चुनाव में लगा दी जो काफी समय पूर्व मर चुके है। अब कोई तो बताये क्या जो लोग मर चुके है वह उप चुनाव में डियूटी करने आयेगे। मामले का ख्ुालासा हुआ तो केवल बीएसए ने इतना कह दिया कि गलती से मरे हुए लोगों की तैनाती कर दी गयी थी क्योकि कागजात अपडेट नही थे इस कारण ऐसा हुआ। कागजात अपडेट नही थे और इसका खुलासा नही हेाता तो क्या चुनाव की डियूटी करने मुर्दे  पहुंच जाते। उप चुनावों को तमाशा बना दिया गया है। इससे चुनाव प्रणाली पर से लोगो का यकीन हटने लगा है। 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Sitapur Breaking News :पत्नी से़ छुब्ध होकर युवक ने लगाई फांसी।

उत्तर प्रदेश में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट की अनिवार्यता पर रोक

यूपी में बैंक के समय में हुआ बड़ा बदलाव