परियोजनाओं का बहना कहीं अधिकारियों और ठेकेदार के खेल का परिणाम तो नही!


 कहां रही कमी जब समुन्दर की लहरों को पत्थरों से थामा जा सकता है तो तटबन्ध के जरिये इन लहरों को क्यो नही?

सीतापुर।  करोड़ो रूपये की परियोजनाए भी घाघरा -सरयू से प्रतिवर्ष होने वाली बाद और कटान से निजात नही दिला पा रही है। शाशन द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर प्रतिवर्ष दिए जा रहे करोड़ो रूपये के एवज में किये पर कोई जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।   रामपुर मथुरा ब्लॉक की शुकुलपुरवा, बगस्ती, कनरखी, अटौरा व अंगरौरा ग्राम पंचायतो की लगभग 35000 आबादी प्रतिवर्ष बाढ़ व कटान से प्रभावित होती है। कटान से आमलोगों को बचाने के लिए 2017 में  तटबंध का निर्माण सिंचाई व बाढ़ खण्ड बाराबंकी द्वारा किया गया था। तटबंध बनने के बाद से लगातार इसे बचाने के लिए प्रतिवर्ष करोड़ो रूपये व्यय किया जा रहा है। 2 वर्षो से लगातार तटबंध के किनारे पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है,किन्तु हैरत की बात यह है कि जब जलस्तर में धीरे धीरे लगातार वृद्धि हो रही है जिससे कार्य पूरा होने में विलंब हो रहा है। सरयू नदी के किनारे बसे ग्रामीणों की माने तो प्रतिवर्ष यह कार्य अप्रैल-मई मे शुरू किये जाते है। परियोजनाओ का 50 फीसदी भी कार्य कभी भी पूरा नही हो पाता है,उससे पहले ही भीषण बाढ़ की शुरुआत हो जाती है। और इस प्रकार परियोजना की बड़ी राशि का बंदरबांट हो जाता है। इस वर्ष भी कटान प्वाइंट के आस पास  करीब साढ़े अट्ठारह किमी की दूरी में चार करोड़ साथ लाख की लागत से पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है जो अभी तक अपूर्ण है। कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे जूनियर इंजीनियर संजीव उपाध्याय ने बताया कि 20 जून तक कार्य पूर्ण हो जाएगा। स्ट्रक्चर बन चुका है केवल फिनिशिंग का कार्य शेष है। किन्तु काम मे लगे मजदूरों की माने तो जलस्तर धीमी गति से प्रतिदिन बढ़ रहा है। ऐसे में तटबंध की नींव में पत्थर लगाने का कार्य बाधित हो रहा है। अब तक केवल 60-65 फीसदी कार्य पूरा हो सका है। जिम्मेदार अधिकारी प्रतिवर्ष कार्य पूर्ण होने के हवा हवाई दावे करते रहे है। किंतु जलस्तर तेजी से बढ़ने पर इनके दावे आज तक कभी भी खरे नही उतरे। इसी प्रकार नदी की धारा को मोड़ने के लिए करीब 10 करोड़ की लागत से ड्रेजिंग एवं चैनलाइजेशन का कार्य फत्तेपुरवा- हेतमापुर बाराबंकी की सीमा तक करीब पौने पांच किलोमीटर में पूर्ण किये जाने का दावा किया जा रहा है। हकीकत यह है कि महज 2-2.5 किमी की लंबाई में 35 मीटर की चैड़ाई में ही यह कार्य किया गया है।अधिकारियों और माननीयो के निरीक्षण के बाद पूरा इतने ही कार्य को पूर्ण मान लिया गया। इसी प्रकार अंगरौरा व अखरी गाँवो को को बचाने के लिए करीब 15 करोड़ की लागत से 3 ठोकर का निर्माण भी होना था। किन्तु इस परियोजना की अभी तक स्वीकृति नही मिल सकी है। इन ठोकरों के निर्मित न होने से इन गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। करोड़ो की राशि प्रतिवर्ष खर्च होने के बावजूद हजारों लोग प्रतिवर्ष बेघर और भूमिहीन हो रहे है। इस पूरे कार्य की जिम्मेदारी उठा रहे सिंचाई व बाढ़ खण्ड बाराबंकी के अधिशाषी अभियंता बीएन गुप्ता ने बताया कि ठोकर निर्माण का एस्टीमेट शाशन से स्वीकृत नही हो सका है। ड्रेजिंग व चैनलाइजेशन  तथा तटबंध के किनारे पत्थर लगाने का कार्य वर्तमान तेजी से चल रहा है और 85-90 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है। 10 दिनों में हम कार्य को पूरा कर तटबंध को पूरी तरह सुरक्षित कर लेंगे।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Sitapur Breaking News :पत्नी से़ छुब्ध होकर युवक ने लगाई फांसी।

यूपी में बैंक के समय में हुआ बड़ा बदलाव

उत्तर प्रदेश में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट की अनिवार्यता पर रोक