गली गली मंे आज बच्चे करते तैयारी किसी को आर ओ बना है तो किसी को आईएएस बनना है

 


बिसवां सीतापुर
।उप्र राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के तत्वावधान में ई कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया ऑनलाइन गोष्ठी की अध्यक्षता  डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी  ने की मुख्य अतिथि साहित्य भूषण कमलेश मौर्य श्मृदुश्  , ने मुख्यअतिथि की भूमिका निभाई.इस कवि गोष्ठी में डॉ त्रिवेणी प्रसाद दुबे श्मनीषश् , हरी प्रकाश हरि ,  सुशील चंद श्रीवास्तव  ,श्रीमती सीमा गुप्ता , डॉ ज्योत्सना सिंह साहित्य ज्योति  एवं श्री चन्द्र देव दीक्षित ने काव्य पाठ कर आयोजन को गरिमा प्रदान की.कवयित्री सीमा गुप्ता के वाणी वंदना से कार्यक्रम की बहुत ही सुंदर शुरुआत हुई।प्रथम कवयित्री के रूप में गीतकार  डॉ ज्योत्सना सिंह     ने नारी शक्ति को नमन करते हुए बहुत ही मधुर स्वर में एक गीत सुनाया, जिसे तालियों के साथ खूब सराहना मिलीधरती है धैर्य धारण धारायणी नारी , प्रेम करुणा की मूरत साकार है नारी,शक्ति सकल सृजन की समाए हुए,नारत्व को धरे तो है नारायणी नारी   सीमा गुप्ता ने भारत के युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बहुत ही सुंदर एवं मधुर स्वर में प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत किया- गली गली में आज बच्चे करते हैं तैयारी.. किसी को आरओ बनना है,  किसी को आईएएस बनना है-से जन जागरण का संदेश देते हुए कार्यक्रम में उत्साह को उच्च शिखर पर पहुंचाया। गले क्रम में श्रेष्ठ उपन्यासकार सुशील चंद श्रीवास्तव जी, ने लोगों के बीच स्वस्थ दिनचर्या के बारे में सुंदर संदेश दिया-स्वतंत्र वैचारिक प्रवाह मानव मस्तिष्क की संतुष्टि और गतिशीलता का आधार है। मस्तिष्क की भूख विचारों के व्यंजन से संतुष्ट होती है। भोजन पाकर मस्तिष्क और भूखा हो  हो जाता है.वहीं पर अपनी सुंदर रचना के माध्यम से हरी प्रकाश श्हरिश् जी ने सबके मन को रोमांचित कर खूब वाहवाही लूटी बहुत हुआ हरि बंद करो अब भाईचारे की बातें कहो कहाँ तक और सहोगे यूँ ही घातें प्रतिघातें भेड़ भेड़िए केर बेर का साथ कहो कब तक प्यारामनुजों का दनुजों से संभव हो कैसे भाईचारा..साहित्यकार एवं उपन्यासकार आदरणीय डॉ त्रिवेणी प्रसाद दूबे श्मनीषश्जी ने बहुत ही सुंदर एवं बहुत ही मधुर स्वर में गीत प्रस्तुत कर सबको भाव विभोर कर दिया- बरस रहा है वसुधा तन पर,अंबर स्नेह दुलार।पावस का संकेत मनोहर,श्यामल-मेघ पुकार।।पवन दिव्य संगीत बना है,वर्षा गाती गीति।बूँद-बूँद के सम्मोहन से,झूम रही है प्रीति।।प्यासी धरती ने पाया है,बारिश से नव प्राण।सभी ओर छाई हरियाली,लगे लोक निर्वाण।।चंचल चपला की आभा में,संचित जीवन सार।पावस का संकेत मनोहर,श्यामल-मेघ पुकार।कार्यक्रम के संचालक चंद्र देव दीक्षित द्वारा अपने सुंदर मुक्तक एवं गजल से कार्यक्रम को एक नई गति प्रदान करते हुए सभी कवियों की भूरी भूरी प्रशंसा  प्राप्त की- जीवन का विस्तार जो देखे दृष्टि वही ही पावन है ।तन मन में हरियाली बो दे ऋतु वही तो सावन है ।खुद के लिए तो जीना-मरना अक्सर करते लोग यहां- परमारथ कर श्रेष्ठ पुजारी व्यक्ति वही मनभावन है।। .गोष्ठी में उपस्थित मुख्य अतिथि साहित्य भूषण  आदरणीय कमलेश मौर्य मृदु जी ने अपने मुक्तक एवं सुंदर गीत से कार्यक्रम से गोष्ठी को नई  दिशा प्रदान किया। फिर धरा पर खींच लायेंगे सबेरों को.मात देकर के रहेंगे हम अंधेरों को. जिधर भी देखो उधर सदमे हुये.कैद सन्नाटे में सब नगमे हुए आज शहनाई रुदन का राग गाती.गीत स्वर लय ताल सब सहमे हुए. फिर खुशी के गीत देंगे हम बसेरों को.सबसे अंत में गोष्ठी के अध्यक्ष आदरणीय डॉ दिनेश चंद्र अवस्थी जी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में सभी कवियों द्वारा किए गए काव्य पाठ को उत्कृष्ट और सार्थक  सृजन कहते हुए अतिशय सराहना की । सभी काव्य मनीषियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए बहुत ही सारगर्भित और सुंदर दोहे प्रस्तुत कर सबके मन को मोह लिया ।भारत राम सा देश यह मै उसका हनुमान।देखो सीना चीरकर, अंदर हिंदुस्तान। पत्नी देती है अधिक, पर लेती है अल्प।पत्नी को खुश रखोगे, ले लो ये संकल्प। जो अपनी अच्छी वही, गांठ बांध लो बात।चीज छुओगे गैर की, जोर पड़ेगी लात स्त्री को प्रभु ने रचा, खूब लगाकर जान।पुरुष बनाने में लगा, बचा-खुचा समान.अंत में संयोजक चंन्द्र देव दीक्षित ने आए हुए सभी मनीषियों के प्रतिआभार प्रकट कर  अगले आयोजन तक इस कार्यक्रम को स्थगित किया।


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