योगी के राज्य में सरायन मांग रही इंसाफ


 सीतापुर।
सीतापुर शहर का इतिहास ही सरायन नदी  पर टिका है। सरायन की चंचलता हमेशा से सीतापुर शहर की मुस्मान रही है। सरायन नदी हमेशा जलचर प्राणीयों का आशियाना रही है उनके जीवकोपार्जन का साधन रही है। लेकिन आज सरायन नदी के बैंक पर भूमाफियाओं की निगाह टिक गयी है। इन भूमाफियाओं से संत्ताधारियों से मिलकर इतना बड़ा पाप किया है अगर यह पाप अनजाने मंे भी हो जाये तो उसको क्षमा नही किया जा सकता हैं। इन भूमाफियाओं ने अपनी निजी स्वार्थ और पैसा कमाने को लेकर अनगिनत जलचर प्राणीयों के जीवन संकट में डाल दिया। आधे से अधिक जलचर इस नदी में मर गये। शहर की सुन्दरता पर कालिक लग गयी। इस नदी के तट पर कई धार्मिक घाट और मंदिर बने हुए थे आज उन घाटो का अस्तित्व ही समाप्त हो रहा है। पवित्र नदी को नाला कैसे करार दिया जा सकता हैं। नगर सबसे प्राचीन घाट और ताड़कनाथ बाबा का मंदिर इसी घाट पर है। ताड़क मंदिर शहर के निवासियेां की आस्था का केन्द्र आज भी है लेकिन आज ताड़कनाथ घाट पर गन्दे  पानी के सिवा और कुछ नही हैं। पावन सरायन नदी हजारों लोगों को रोजगार दिये हुए थी। इसी नदी के घाट पर प्राचीन धोबी घाट है जहंा से सैकड़ो की संख्या में धोबी लोग सदियों से लोगों के कपड़े धोते चले आ रहे है। शहर का लोकप्रिय व आस्था का केन्द्र कहा जाने वाला संाई बाबा का मंदिर भी इस नदी के बैंक पर बना है। यह वही न दी है जिसमें राजनेताओं ने सप्ताहों नदी के जल में बैठकर आन्दोलन किया था। मंदिरों के घाट तो सरायन से जुड़े थे यहां पर लोग मार्जन करते और नदी को देवी का रूप मानकर यहां पूजा अर्चना करते थे। लेकिन भूमाफियाओं और बड़े सियासत दानों ने जो खेल खेला है उससे शहर का बडा वर्ग आहत है। इस नदी के बैंक पर भूमाफियाओं की नजर पहले से ही गड़ी थी उन्होेने धन के बल पर सत्ताधारियों को अपने इस महापाप में शामिल करके नदी को नाला घोषित करवा दिया। पिछले कई सालों से  सरायन में पानी नही छोड़ा जा रहा है। बरसात में पानी न छोड़े जाने का पूरा पूरा फायदा भूमाफियाओं ने उठाया और नदी के अस्तित्व को ही खत्म कर दिया हैं। भूमाफियाओं के चगंुल में फंसकर प्रशासन ने भी इसका कोई विरोध नही किया और नदी के किनारों तक भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया। आज भी इस ओर किसी का ध्यान नही जा रहा हैं। सूत्रो की माने तो प्रदेश सरकार सरायन को आज भी  नदी का दर्जा दिये हुए है। सरायन नदी की सुन्दरता को नगर विधायक ने अपनी पूरी पूरी नदी की सुन्दरता को संवारने में लगा दी लेकिन परिणाम क्या निकला? सरायन फिर से नदी  नही बन सकी। अगर सरायन को नाले का दर्जा दिया गया तो सीतापुर के लिये ना इंसाफी होगी। आज सरायन अपनी दशा और दुदर्शा दिखाकर इंसाफ मांग रही है। जो किसी भी कीमत  पर नही होना चाहिए था सीतापुर की गन्दी राजनीति और भूमाफियाओं की ताकत ने वह कर दिया। क्या किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ करना उचित है। शहर में पूरी तरह से भूमाफिया सक्रिय है नजूल की भूमि का सौदा पहले ही हो गया है नजूल भूमि पर अवैध रूप से भवन बन चुके है यहां तक ग्रीन बेल्ट और मैंगो लीज का सौदा तक हो गया। एक छोटे से सी ग्रेट के जिले में अरबो रूपये का भूमि घोटाला इस पर प्रशासन की चुप्पी यह किसी भी मायने में उचित नही हैं। भूमाफियाओं ने शुरूआत नजूल भूमि से की। सीतापुर नगर पालिका के पास भारी मात्रा में नजूल भूमि थी यह भूमि बिना शासन की अनुमति से इसका  पटटा कर दिया। यह कार्य दशको से चलता आ रहा है जब शहर की  नजूल भूमि खत्म हो गयी तो सरायन नदी पर भूमाफियाओं की नजर पड़ गयी यह सरायन नदी इतनी पवित्र नदी मानी जा रही है कि इस नदी में दर्जनों की संख्या में धार्मिक देव स्थान बसे है और देव स्थानों की पूजा अर्चना के लिये पानी इसी नदी से जाता था लेकिन जब से यह नदी नाला घेाषित कर दी गयी है तब से इस नदी का अस्त्वि ही संकट में पड़ गया हैं। 


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