फर्जीवाड़ा कर ट्रस्ट की भूमि पर मारुति शोरूम बनाने वाले संजीव अग्रवाल पर केस दर्ज

 


उप निबंधक सहित कई अन्य पर भी एफआईआर,जल्द चल सकता है मारुति शोरूम पर बुलडोजर

-ज्ञानयोग धर्मार्थ ट्रस्ट की जमीन पर बना है कांसेप्ट कार का शोरूम
-शहर के लखनऊ रोड पर है ज्ञानयोग धर्मार्थ ट्रस्ट की जमीन 
-शिकायतकर्ता शरद द्विवेदी ने वर्ष 2017 में शिकायत की थी
-मार्च 2021 में उच्च न्यायालय में एक पिटीशन दाखिल की गयी थी
हरदोई।शहर के लखनऊ रोड स्थित ज्ञानयोग धर्मार्थ ट्रस्ट की जमीन पर बने अवैध मारुति शोरूम के मालिकों पर कानूनी कार्यवाही का शिकंजा कस गया है। ट्रस्ट व सरकारी जमीन को फर्जीवाड़ा व धोखाधड़ी से हथियाने वाले सजीव अग्रवाल पर मुकदमा दर्ज हो गया है। एफआईआर में तत्कालीन उप निबंधक सदर भगवान सिंह सहित कुछ अज्ञात नाम भी शामिल किए गए हैं। अब वह दिन दूर नही जब उक्त मारुति कार के शोरूम पर बुलडोजर चलेगा। हाईकोर्ट के दखल के बाद केस दर्ज किया गया है। सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट की भूमि का अनुबंध पूर्व में ही समाप्त हो चुका था,इसलिए अब पुनः ग्राम पंचायत के खाते में उक्त भूमि वापस हो जाएगी और इस पर ग्राम पंचायत का अधिकार होगा।
     विदित हो कि शिकायतकर्ता शरद द्विवेदी ने वर्ष 2017 में शिकायत की थी, जिसमें आरोप लगाया था कि सरकार ने धर्मार्थ के कार्यो हेतु ज्ञानयोग धर्मार्थ ट्रस्ट के पक्ष में सन1986 में सरकारी भूमि को आवंटित किया किया था, लेकिन ट्रस्टी सजीव अग्रवाल ने उक्त जमीन को फर्जीवाड़ा कर नियमविरुद्ध अपने ही पुत्रो को बेच दिया व गलत तरीके से ट्रस्ट की जमीन पर उनके पुत्रो ने अवैध मारुति शोरूम बनवाया है। हालांकि शिकायत के बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा इस मामले में कोई रुचि नही ली गयी, जिसके बाद शिकायतकर्ता द्वारा मार्च 2021 में उच्च न्यायालय में एक पिटीशन दाखिल की गयी थी जिसमे उच्च न्यायालय के दखल के बाद शासन-प्रशासन जागा है। हाईकोर्ट ने विगत 18 मार्च को लखनऊ मंडल के आयुक्त को उक्त प्रकरण में प्रतिशपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया था।
      मंडलायुक्त रंजन कुमार द्वारा विगत 26 मार्च को हरदोई के जिलाधिकारी को जारी पत्र में जवाब मांगा गया था कि उक्त ट्रस्ट की भूमि में तत्कालीन तहसीलदार व नायब तहसीलदार ने द्वारा गलत तरीके से नामांतरण एवं भूमि का श्रेणी परिवर्तन किया गया है। इससे प्रथमदृष्ट्या गंभीर अनियमितता परिलक्षित हो रही है। इसलिए जांच कमेटी गठित कर सम्यक जांच कराएं, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए अपनी संस्तुति सहित आख्या एवं प्रश्नगत पीआईएल की प्रति पैरावाइज नैरेटिव एवं प्रकरण से संबंधित अभिलेखों एवं समस्त सूचनाएं शासन एवं मंडलायुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराएं। 
     जिलाधिकारी ने उक्त प्रकरण की गहनता से जांच हेतु नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी सदर व बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी की तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। हालांकि राजस्व से जुड़े अधिकारी तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार को बचा लिया गया है। जबकि सजीव अग्रवाल व उप निबंधक व अन्य के विरुद्ध धारा 419, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।कानूनी जानकारों की मानें तो हाईकोर्ट द्वारा की जा रही कार्यवाही से स्पष्ट है कि ट्रस्ट की भूमि पर बने मारुति कार के शोरूम पर सीघ्र ही बुलडोजर गरजेगा, और उक्त भूमि को ग्राम पंचायत के खाते में वापस करना होगा।

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