मनरेगा में मची लूट ,खामोश बैठे डीसी मनरेगा


 शिकायतों के बाद भी नही हो पा रही ठोस काार्यवाही

सीतापुर। पंचायत राज व्यवस्था के तहत घोटालेबाजी में मनरेगा योजना केा नम्बर एक पर गिना जा रहा है। मनरेगा योजना 

में गडबड़ घोटालो को लेकर समय समय पर खुलासे भी होते रहे है लेकिन किसी भी जिम्मेदारी द्वारा मनरेगा पर कोई ठोस कदम नही उठाये जा सके है। चूंकि मनरेगा के जिम्मेदार अधिकारी इन घोटालेबाजों को संरक्षण देर हेै फिर मनरेगा में गड़बड़ घोटाला करना बेहद आसान है। मनरेगा का पैसा बतौर कमीशन के रूप में पंचायत राज विभाग को भी जा रहा है इस तरह की जानकारियां भी लगातार मिल रही है। सूत्रो की माने तो पंचायत राज व्यवस्था के तहत ग्रामसभा पंचायत के किसी भी खाते से पैसा निकालने का अधिकार प्रधान और सचिव को ही है और सचिव जिला पंचायत राज अधिकारी के अधीन आता है इस कारण मनरेगा में जो घोटालो होता है उसका एक बड़ा पंचायत राज विभाग में भी जाता है इस बार चर्चाएं की जा रही है। सूत्रो की माने मनरेगा घोटाले के मामले रेउसा, रामपुर मथुरा सकरन ब्लाक नम्बर एक पर गिने जा रहे है । इन सभी ब्लाको में हर वर्ष बाढ़ आती है इस कारण यह ब्लाक मनरेगा घोटाले के मामले में नम्बर एक पर गिने जा रहे है। क्येाकि यहां  मनरेगा के तहत एक विशेष योजना तैयार की जाती है जिसमें बड़ा घोटाला किये जाने की रणनीति बनाते हुए मनरेगा में कच्चे काम को ज्यादा से ज्यादा दिखाया जाता है और उसके बाद बाढ़ में उस कार्य को बह जाना दिखा दिया जाता है। जबकि हकीकत में होता कुछ और ही है। सूत्रो द्वारा दावा किया जा रहा है कि मनरेगा का कच्चा का कार्य केवल कागजो पर ही चढ़ता है और कच्चा काम अधिकारियों की सबसे बड़ी आमदनी का जरिया का जरिया है। हलांकि गडबड़ पक्के कार्यो में भी किया जाता है सूत्रो का द्वारा है कि मनरेगा के तहत कच्चे और पक्के कामों का साठ चालिस का रेसियों चलता है यानी साठ प्रतिशत पक्का काम करवाने के बाद चालिस प्रतिशत कच्चा काम होता है जो यह चालिए प्रतिशत का रेसियों है यही सबसे बड़ी घेटालो की मूल है। सूत्रो की माने तो जिले के कुछ ब्लाक ऐसे भी जहंा पर तालाब की मरम्मत और सौन्दर्यीकरण के नाम पर पचासों लाख रूपये का हेर फेर किया जा चुका है। सूत्रो का दावा है कि प्रधान, सचिव व जेई ने मिलकर तालाबो की स्टीमेट, बनाकर कागजों पर काम होना भी दिखा दिया और उसके बाद जेई के आगणनप पर पैसा खाते निकल गया और बंदबाट हो गया है। इसकी जनकारी जागरूको को लगी तो उन्होने इसका विरोध किया खण्ड विकास अधिकारी के संज्ञान में मामला गया उन्होने जांच का दावा कर दिया। सूत्रो की माने तो जांच का दावा करने के बाद एक लिफाफा खण्ड विकास अधिकारी के पास पहुंचा और उनका कमीशन तय हो गया है। जैसे ही खण्ड विकास अधिकारी की जेब गर्म हुई जांच दब गयी। अब कवेल ग्रामसभा की जनता ही कह रही है कि ब्लाक के अधिकारी ग्रामसभाओं को लूट रह है लेकिन अधकारी मसटटी साधे बैठे हुए है। मनरेगा में हो रहे घोटाले अब राजनैतिक दलों के संज्ञान में है और राजनैतिक दलो द्वारा जबरदस्त विरोध किया जा रहा है राजनैतिक दलों ने आन्दोलन करने की भी चेतावनी दे दी है। गौरतलब यह भी है कि मनरेगा में लगातार घेाटाले हो रहे है इसके बाद भी डीसी मनरेगा शांत बैठे है वह भी उस स्थित में जब गैर जनपदीय कार्यदायी संस्थाओं को टेण्डर दिया गया है मनरेगा का काम ठेकेदारी प्रथा को अपनाकर मशीनों के माध्यम से करवाया गया। क्या यह उचित है ऐसा डीसी ने क्यो किया इसका जवाब भी डीसी को देना होगा। 


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