सरकारी कागजों में `स्वर्गवासी` हो चुका विश्वनाथ उर्फ सिमरन पांडेय कह रहा साहब हम जिंदा है

 


खुद को जिंदा साबित करने के लिए 20 साल से भटक रहा है युवक

-विश्वनाथ उर्फ सिमरन का आरोप,फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के बाद फर्जी तरीके से बिक्री की गई उसकी जमीन
-युवक 20 वर्षों से स्वयं को जिंदा साबित करने के लिए अधिकारियों के ऑफिस का चक्कर लगा रहा
-टडियावा थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव का है मामला
हरदोई।आम और छोटी छोटी समस्याओं को लेकर अधिकारियों के दफ्तरों के बाहर तमाम लोगों के भटकते देखा जाना आम बात है, लेकिन टड़ियावां थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव का रहने वाला विश्वनाथ उर्फ सिमरन पांडेय अपने आप को जिंदा साबित करने के लिए रोज अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है।वह यह चक्कर साल दो साल से नही 20 साल से लगा रहा है और सिस्टम के कारण 'स्वर्गवासी' बना घूम कर हर अधिकारियों से यह फरियाद लगा रहा कि कोई उसे कागजों में जिंदा कर दे और उसकी जमीन दिला दे।
     टड़ियावां थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव के रहने वाले विश्वनाथ उर्फ सिमरन पांडेय का कहना है कि उसके माता पिता दिव्यांग थे।उसकी देखभाल जो उसकी बुआ थी उन्होंने की और वह काफी समय से हरदोई के एक टेंट हाउस में काम करके अपना पेट भर रहा है।उसके मा बाप की दिव्यांगता का फायदा उठाकर और मौत के बाद उसके ही गांव के कुछ लोगों ने उसको भी कागजों में मृत घोषित कर दिया और उसकी गांव की 13 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया।आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी बैनामा भी करा लिया है।
     पीड़ित व्यक्ति का कहना है कि वह दफ्तरों के चक्कर काट रहा है कि जिन लोगों ने उसके साथ ऐसा किया है उन पर कार्यवाई की जाए।उसको य तो जमीन वापस दिलाई जाए अन्यथा उस जमीन का पैसा दिलाया।अब तक स्वर्गवासी बने घूम रहे अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर वह इसी उम्मीद में लगा रहे हैं कि कोई उन्हें कागजों में जिंदा कर दे और उसको उसका हक मिल सके।

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