कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिये तैयार हो रहा जिला अस्पताल


 10 बेड का  बना पीडियाट्रिक जो कोरोना से करेगा सुरक्षा

स्वास्थ्य महकमा हुआ सक्रिय, सामाजिक संगठन भी सहायता के लिये बढ़ा रहे हाथ

सीतापुर। कोरेाना की रफ्तार से एक कदम आगे चल  रहा है स्वास्थ्य विभाग। सीतापुर  में कोरोना की तीसरी लहर आनी तय मानी जा रही है इसको ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल ने कोरोना से युद्ध करने की तैयारियां कर ली है। वह सभी इंतजाम करने शुरू कर दिये गये है जिससे कोरोना की तीसरी लहर को भी परास्त किया जा सके। अभी सीतापुर दूसरी लहर के दौर से गुजर रहा है जिससे सीतापुर की काफी जनहानि हो रही है। उधर कोरोना की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिये अपनी जाबाज टीम के साथ जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज भी कोरोना से टक्कर से लेने के लिये मैदान ए जंग में पूरी तरह से उतर चुके है और वह बेखौफ होकर कोरोना के खात्मे का ताना बाना बुन रहे है मामला शवाब पर है अगर ऐसे में माहौल में स्वास्थ्य महकमें और डीएम को जनता का सहयेाग मिल जाये तो कोरोना की चेन तोड़ने अब देर नही लगेगी। बस जिले की जनता कोरेाना  प्रोटोकाल का सख्ती के साथ पालन कर ले तो समझो कोरोना खत्म हो गया और तीसरी लहर आने की संभावना ही खत्म हो जायेगी। उधन सबसे बड़ी बात तो यह है कि कोरोना के साथ चल रही जंग में अब सामाजिक संगठन भी स्वास्थ्य महकमें का सहयोग देने लगे है जिससे कोरोना कमजोर पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। इस लहर में बच्चों के संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए जिला अस्पताल में 10 बेड का पीडियाट्रिक बनाया गया है। इस यूनिट में बाल रोग विशेषज्ञ बच्चों की निगरानी करेंगे। बच्चों को पाइपलाइन के जरिये ऑक्सीजन दी जाएगी। कोरोना की दूसरी लहर जानलेवा साबित हो रही है। विशेषज्ञ तीसरी लहर आने की आशंका जाता रह हैं। इस लहर में बच्चों को अधिक संक्रमित होने का दावा किया जा रहा है। इस पर स्वास्थ्य महकमे ने खासकर बच्चों के इलाज के लिए तैयारी शुरू कर दी हैं। जिला अस्पताल में 10 बेड का पीडियाट्रिक बनाया गया है। इस यूनिट में तीन बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती की गई है। जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चों के लिए कोविड की दवाइयां मौजूद हैं। अगर कोई बच्चा गंभीर होता है और ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उसे ऑक्सीजन दी जाएगी। इस यूनिट में ऑक्सीजन की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। 24 घंटे यूनिट चलती रहेगी। गंभीर हालत में बच्चा आने पर पहले इमरजेंसी में दिखा जाएगा। उसके बाद उसे इस यूनिट में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जिला अस्पताल में इस समय सिलेंडर के जरिये मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई दी जाती है। जबकि पूरे अस्पताल में पाइपलाइन बिछी हुई है। ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए कोविड वार्ड के पास ऑक्सीजन प्लांट लगाया जा रहा है। इसके मई माह के अंत तक पूरा होने की बात कही जा रही है। सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि जून के पहले सप्ताह में यह प्लांट शुरू हो जाएगा। उससे ऑक्सीजन की कमी पूरी हो जाएगी। इस प्लांट से सीधे पाइपलाइन के जरिये अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंचाई जाएगी, जिससे सिलेंडर पर निर्भरता भी कम हो जाएगी। आसानी से मरीजों को ऑक्सीजन मिल जाएगी। जिला अस्पताल के डॉ. नंद नथानी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, ने बताया कि संक्रमण से बच्चों को बचाने की विशेष जरूरत है। बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें। उन्हें घर पर ही सुरक्षित रखें। मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें। बच्चों की इम्युनिटी कम होने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। परिवार के सदस्य भी जरूरी होने पर बाहर निकलें। मास्क लगाए रहें। जब भी घर पहुंचे तो पहले अच्छी तरीके से स्नान करें। हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें। बच्चों को स्पर्श करने से बचते रहे। इसका ख्याल रखकर बच्चों को संक्रमण से बचा सकते हैं।


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