तुर्की बना रहा भारत और नेपाल के खिलाफ खतरनाक प्लान, इस्लामिक सेंटरों का किया जा रहा निर्माण


 तुर्की अब आए दिन भारत के लिए नई-नई मुश्किलें पैदा करने में लगा है। यूनाइटेड नेशन ह्यूमन राइट काउंसिल के 46वें सेशन में तुर्की ने भारत को कश्मीर मुद्दे और मानवाधिकारों पर घेरा था। अब तुर्की के भारत और नेपाल के खिलाफ खतरनाक प्लान का खुलासा हुआ है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की भारत और नेपाल के खिलाफ खतरनाक प्लान बना रहा है। तुर्की का मकसद भारत-नेपाल बॉर्डर पर अशांति फैलाना है। इसके लिए तुर्की ने आतंकियों के ग्रुप को बॉर्डर पर अपना अड्डा जमाने के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकी अपना काम शुरू कर चुके हैं और इन्हें जल्द ही नहीं रोका गया तो ये बेहद ही खतरनाक साबित हो सकते हैं। 

नेपाल को टारगेट कर भारत में अशांति फैलाने का तुर्की प्लान

खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक आतंक फैलाने की जिम्मेदारी तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने सौंपी है। बताया जा रहा है कि इस संगठन को अलकायदा का समर्थन प्राप्त है। तुर्की की संस्था नेपाल में इस्लामिक संघ नेपाल के साथ मिलकर सक्रिय हो चुकी है। भारत की खुफिया एजेंसी लगातार इस संगठन पर नजर रख रही है। नार्दिक मॉनिटर नामक अखबार में इस आतंकी साजिश को लेकर एक रिपोर्ट छपी है जिसमें तुर्की खुफिया एजेंसी आईएमटी को इस साजिश का मास्टर माइंड बताया गया। आईएचएच को तुर्की ने नेपाल को टारगेट और भारत में अशांति फैलान के लिए भेजा है। आईएचएच मानव सेवा के नाम पर कई  प्रोजक्ट चला रहा है। आईएचएच के टॉरगेट में वो इलाकें हैं जो भारतीय सीमा के पास हैं। ये संगठन भारत नेपाल सीमा पर रहने वाले मुस्लिम समुदाय के बीच तेजी से पैर पसार रहा है। 

2020 में इस बात का भी खुलासा हुआ था कि तुर्की अब भारत के भीतर भी देश विरोधी गतिविधियों की फंडिंग करने में लग गया है। जिसके लिए वो काफी समय कश्मीर और केरल दोनों राज्यों की कट्टर इस्लामिक रेडिकल ऑर्गनाइजेशन को टारगेट कर रहा है। एक उच्च सरकारी अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया कि तुर्की भारत में मुसलमानों में कट्टरता घोलने और चरमपंथियों की भर्तियों की कोशिश कर रहा है। उसकी कोशिश दक्षिण एशियाई मुस्लिमों पर अपने प्रभाव के विस्तार की है। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया था कि तुर्की की सरकार सैयद अली शाह गिलानी जैसे कश्मीर के कट्टरपंथी अलगाववादी नेताओं को कई सालों से पैसे देती रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान के साथ मिलकर तुर्की जाकिर नाइक को भी कतर के रास्ते फंडिंग की है। 

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