रामलीला में देवताओं से मेघनाथ ने किया युद्ध


 
हरदोई। नुमाइश मैदान में चल रही श्री रामलीला में सोमवार को स्वामी कन्हैयालाल के निर्देशन में रामलीला का मंचन किया गया। 

    मंचन में दिखाया गया कि रावण सभा में बैठा है। उसका परिवार बढ़ने लगा है। एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती हुए। अपने परिवार की गणना करने लगा तभी देवताओं से बदला लेने के लिए अपने पुत्र मेघनाथ को देवताओं से लड़ने भेजा। वहां जाकर मेघनाथ ने घोर घमासान युद्ध किया और देवताओं को बंदी बना लिया। सब देवताओं को घेरकर रावण के पास ले आया रावण ने सभी देवताओं को बंदी बनाया और अपनी सेवा पर लगा लिया। फिर संतों को बुलाकर उनका रक्त निकाला उसके कारण संतो ने श्राप दे दिया। भय के कारण रावण ने रक्त के घड़े को मिथिला की सीमा में गड़वा दिया। रावण के अत्याचार बढ़ने लगे। पाप ही पाप होने लगा। पाप के कारण देवी पृथ्वी अकुलाने लगी। भयभीत होकर देवताओं की शरण में गई। सभी देवता मिलकर ब्रह्मा जी की शरण में गए। शंकर भगवान के पास गए किसी से पृथ्वी की सहायता नहीं हुई। भगवान की स्तुति की तब आकाशवाणी हुई कि-जन डरपऊ मुनि सिद्ध सुरेशा। 
तुम हित लाग धरौं नर भेषा।।
मैं तुम्हारे हित के लिए अवतार लेकर आ रहा हूं इसके बाद देवता हर्षित हुए।

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